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आतंकी मसूद का फिर ढाल बना ड्रेगन, चौथी बार किया प्रस्ताव के विरोध में वीटो

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डेस्क:— चीन ने एक बार फिर जैश सरगना मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित होने से बचा लिया है। यूएन में इस प्रस्ताव के विरोध में अपने वीटो पावर का इस्तेमाल किया है। चीन के इस कदम से भारत की प्रयासों को झटका लगा है।
भारत के अथक प्रयासों के बाद इस प्रस्ताव के पक्ष में यूके, यूएस, फ्रांस और जर्मनी पहले से ही थे, चीन ने 2009 से चौथी बार इस प्रकार का वीटो दिया है। अंतिम घंटे में चीन ने अपना वीटो इस्तेमाल कर इस प्रस्ताव पर रोक लगा दी।
गौरतलब है कि मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने के प्रस्ताव पर रोक लगाने के लिए चीन के पास बुधवार की रात 12.30 बजे तक का समय था। इस महत्वपूर्ण बात है कि मसूद अजहर ने पुलवामा हमला कराया था जिसमें सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे,हमले के बाद भारत ने विश्व समुदाय से उसे ग्लोबल आतंकी घोषित करने की मांग की थी, भारत के अनुरोध के बाद ही यूएन में इस प्रस्ताव को लाया गया था।
भारत के विदेश मंत्रालय ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा कि हम निराश हैं। लेकिन हम सभी उपलब्ध विकल्पों पर काम करते रहेंगे।
मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि हम उन देशों के आभारी हैं जिन्होंने अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने की कवायद में हमारा समर्थन किया है, इससे पहले, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 अल कायदा सेंक्शन्स कमेटी के तहत अजहर को आतंकवादी घोषित करने का प्रस्ताव 27 फरवरी को फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका ने लाया था।
पिछले 14 फरवरी को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में जैश के फिदायीन ने सीआरपीएफ के काफिले पर हमला कर दिया था जिसमें 44 जवानों की मौत हो गई थी, इस हमले की वजह से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव पैदा हो गया था। चीन ने ही पहले भी तीन प्रस्तावों पर भारत की कोशिश में अड़ंगा डाला था। पुलवाामा हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इस हमले की निंदा की थी। उस समय भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा पुलवामा हमले को लेकर जैश का नाम लिये जाने पर चीन ने अड़ंगा लगाया था। जबकि इस आतंकी हमले की आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने हमले की जिम्मेदारी ली थी।
सुरक्षा परिषद ने इस घटना के अपराधियों, षडयंत्रकर्ताओं और उन्हें धन मुहैया कराने वालों को ‘इस निंदनीय कृत्य’ के लिए जिम्मेदार ठहराए जाने और न्याय के दायरे में लाने की जरूरत को रेखांकित किया। संयुक्त राष्ट्र की 15 शक्तिशाली देशों की इस इकाई ने अपने बयान में पाकिस्तान के आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद का नाम भी लिया। इस पूरे मामले में देश में युद्ध का सा माहौल तैयार करने वालों के सामने एक बात साफ हो गई है कि बदलते वैश्विक हालातों में युद्ध जैसी बात करना एकदम सही नहीं है। पाक की सरपरस्ती में रहने वाले अजहर मसूद के आतंकी होने की पर्याप्त बातें सामने आने के बाद भी आप एकतरफा या बिना वैश्विक सहयोग से कोई सटीक नहीं लड़ सकते हैं।

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