चितई मंदिर ट्रस्ट
uttarakhand high court file photo

अल्मोड़ा, 27 अक्टूबर 2020- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पत्रकार उमेश शर्मा व अन्य के खिलाफ राजद्रोह मामले में राज्य सरकार द्वारा दर्ज एफआईआर को खत्म करते हुए सीएम पर लगाए आरोपों की सीबीआई जांच के आदेश Big order of Nainital High Court दिए हैं ।

न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी की एकलपीठ ने पत्रकार उमेश शर्मा व अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिए।(Big order of Nainital High Court) 

मामले के अनुसार उमेश शर्मा पक्ष की तरफ से सोशियल मीडिया में एक व्यक्ति उनकी पत्नी के खिलाफ एक न्यूज़ डाली गई थी। इसे गलत मानते हुए उनके खिलाफ आई.पी.सी.की धारा 420, 467, 468, 469, 471 और 120बी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था|


बाद में सरकार की तरफ से इन लोगों के खिलाफ राजद्रोह का भी मुकदमा दायर किया गया था। मंगलवार को एकलपीठ ने अपने 83 पेज के फैसले में पत्रकार व उनके साथियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को क्वेश यानि खत्म करते हुए फेसबुक पर पत्रकार उमेश द्वारा मुख्यमंत्री पर लगाए आरोपों की सीबीआई जांच करने के आदेश दिए हैं। (Big order of Nainital High Court) 

उत्तराखंड (Big order of Nainital High Court) हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री के खिलाफ फेसबुक पोस्ट लिखने के मामले में दर्ज प्राथमिकी को निरस्त कर दिया है। साथ ही पूरे मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। इस मामले में सेवानिवृत्त प्रोफेसर हरेंद्र सिंह रावत ने 31 जुलाई को देहरादून थाने में उमेश शर्मा के खिलाफ ब्लैकमेलिंग करने सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।

अल्मोड़ा- पब्लिक स्कूल एजुकेशनल एंड फैलफेयर सोसायटी ने डीएम (DM) को किया सम्मानित


मुकदमे के अनुसार उमेश शर्मा ने सोशल मीडिया में खबर चलाई की प्रो हरेंद्र सिंह रावत व उनकी पत्नी डॉ सविता रावत के खाते में नोटबन्दी के दौरान झारखंड से पैसे जमा कराने और इन पैसों को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत को देने को कहा था।

इस वीडियो में डॉ सविता रावत को मुख्यमंत्री की पत्नी की सगी बहन बताया गया है। रिपोर्ट कर्ता के अनुसार ये सभी तथ्य असत्य हैं और उमेश शर्मा ने बैंक के कागजात कूटरचित तरीके से बनाये हैं। उसने उनके बैंक खातों की सूचना गैर कानूनी तरीके से प्राप्त की है । इस मामले में बीच में ही आरोपी के खिलाफ गैंगस्टर भी लगा दी थी।(Big order of Nainital High Court) 


बाद में उमेश शर्मा ने अपनी गिरफ्तारी पर रोक के लिये हॉइकोर्ट में याचिका दायर की थी उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल व अन्य ने पैरवी की थी। उनकी दलील थी कि नोटबन्दी के दौरान हुए लेनदेन के मामले में उमेश शर्मा के खिलाफ झारखंड में मुकदमा दर्ज हुआ था। जिसमें वे पहले से ही जमानत पर हैं । इसलिये एक ही मुकदमे के लिये दो बार गिरफ्तारी नहीं हो सकती है|(Big order of Nainital High Court)

कृपया हमारे youtube चैनल को सब्सक्राइब करें

https://www.youtube.com/channel/UCq1fYiAdV-MIt14t_l1gBIw/videos