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Haldwani- मुक्त विवि के रवैये पर भड़के शिक्षक, आंदोलन की दी चेतावनी

Teachers outraged over mukta vivi's attitude

हल्द्वानी, 5 जनवरी

उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के शिक्षक विवि प्रशासन के रवैये के ख़िलाफ़ भड़क उठे हैं। बताया गया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन संविदा पर रखे शिक्षकों का कार्यकाल पहली बार सिर्फ़ एक महीने के लिए बढ़ा रहा है और इससे खफा शिक्षकों ने कुलसचिव के माध्यम से कुलाधिपति राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर शिक्षको की संविदा कम से 6 महीने या 2 साल करने की मांग की है।


इस सिलसिले में आज विश्वविद्यालय में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (यूटा) कार्यकारिणी की एक आपात बैठक में शिक्षकों का उत्पीड़न किसी हाल में बर्दाश्त नहीं किये जाने की बात कही गयी।मुक्त विश्वविद्यालय में पिछले दिनों मुख्य गेट पर प्रशासन के ताला लगा देने के बाद बाद प्रशासन और शिक्षक आमने-सामने हैं. शिक्षकों का कहना है कि प्रशासन उनका उत्पीड़न करने पर उतारू है और उन पर तरह-तरह के दबाव बना रहा है।


शिक्षक संघ की बैठक में चर्चा हुई कि जब तक पदों पर स्थाई नियुक्ति नहीं होती सभी शिक्षकों को समान काम के बदले समान वेतन दिये जाने की प्रक्रिया शुरू की जाए। विश्वविद्यालय के सभी फैसले लोकतांत्रिक और पारदर्शी तरीक़े से लिए जाएं. शिक्षक संघ ने कुलाधिपति को ये भी लिखा है कि एक असुरक्षित शिक्षक कभी समाज में विवेकशील विद्यार्थी और खुले दिमाग के नागरिक नहीं बना सकता। उनकी नौकरी का सुरक्षित ना होना पूरे समाज के विकास में बाधक हो सकता है. विश्वविद्यालय में कई शिक्षक पिछले एक दशक से भी ज़्यादा वक़्त से संविदा पर काम कर रहे हैं। उनके साथ इस तरह का रवैया बर्दाश्त करने लायक नही है।
शिक्षक संघ की बैठक में ये भी चर्चा की गई कि प्रशासन अपनी कार्यप्रणाली की आलोचना सुनने के लिए तैयार नहीं है। ऐसा रवैया विश्वविद्यालय के लोकतांत्रिकरण के ख़िलाफ़ है। विश्वविद्यालय के इतिहास में ये पहली बार हो रहा है कि लंबे अरसे से काम कर रहे असिस्टेंट प्रोफेसर्स का कार्यकाल सिर्फ़ एक महीने के लिए बढ़ाया जा रहा है। इसके लिए उनके कार्य का मूल्यांकन करने की बात करना बेईमानी है।क्यों कि कई शिक्षक एक दशक से भी ज़्यादा वक़्त से काम कर रहे हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय के विकास में अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष लगाये हैं।

शिक्षक संघ ने तय किया है कि संविदा शिक्षकों का कार्यकाल ना बढ़ाये जाने पर क्रमबद्ध तरीक़े से आंदोलन चलाया जाएगा. आंदोलन की शुरूआत एक दिवसीय धऱने से होगी उसके बाद क्रमिक अनशन और आमरण अनशन किया जाएगा.

कार्यकारिणी की बैठक और कुलसचिव को ज्ञापन देने वालों में शिक्षक संघ अध्यक्ष भूपेन सिंह, उपाध्यक्ष, शालिनी चौधऱी, महासचिव राजेंद्र कैड़ा, संयुक्त सचिव शालिनी सिंह, उप सचिव, राजेश मठपाल, लता जोशी, मोहम्मद तारिक़, कोषाध्यक्ष वीरेंद्र कुमार सिंह मौजूद थे.

यूटा अध्यक्ष भूपेन सिंह ने कहा है कि शिक्षकों का उत्पीड़न किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. पिछले कुछ वक़्त से विश्वविद्यालय ग़लत वजहों से चर्चा में है. इसके लिए विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली ज़िम्मेदार है. अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना शिक्षकों का संवैधानिक अधिकार है और वे प्रशासन की मनमानी नहीं चलने देंगे.

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