Almora ssj parisar matar bhasha divas

अल्मोड़ा, 21 फरवरी 2021

सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, Almora में अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर एक गोष्ठी आईजीत की गई। गौरतलब है कि वर्ष 1999 में यूनेस्को द्वारा 21 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस घोषित किया था।

इस वर्ष इस दिवस के मौके पर मानव संसाधन विकास शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर मातृभाषाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विविध कार्यक्रम आयोजित करने की अपील की थी और उन्होंने 21 से 23 फरवरी तक इस दिवस को मातृभाषा दिवस के रूप में मनाने तथा इस अवसर पर मातृभाषा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विविध कार्यक्रम आयोजित करने का आह्वान किया गया था।

इस मौके पर आयोजित वेबिनार में आज सोबन सिंह जीना परिसर के विद्यार्थियों ने भी भागीदारी की और विश्वविद्यालय, Almora के विद्यार्थी वेबिनार से जुडे और मुख्य अतिथि के उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, संस्कृति और पर्यटन राज्य मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल, कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि संजय धोतरे के विचारों को सुना।

मात्रा भाषा दिवस पर आयोजित विचार गोष्ठी को संबोधित कार्टेब हुए Almora सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर नरेंद्र सिंह भंडारी ने कहा की अपनी मातृभाषा, अपनी संस्कृति है। मातृभाषाओं के बल पर ही देश,विश्व में जाना जाता है। हमें अपनी विलुप्त होने की कगार पर खड़ी मातृभाषाओं को बचाने के लिए प्रयास करना होगा।

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उन्होंने मातृभाषा को प्रोत्साहन देने के लिए निबंध प्रतियोगिता, वाद विवाद , संगीत, नृत्य आदि कार्यक्रमों के माध्यम से मातृभाषा को बचाने के लिए आगे आने की अपील की। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ विपिन चंद्र जोशी ने कहा कि मातृभाषा है तो भारतीय संस्कृति है। इसलिए हमें मान और सम्मान के साथ अपनी भाषाओं को बढ़ावा देना होगा।


हमें अपनी क्षेत्रीय भाषाओं को भी बचाने के लिए आगे आना होगा। समाज के सामने लाने के लिए आपको कार्य करना होगा। हमें अपनी मातृभाषाओं में लेख लिखने होंगे। हमें भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के प्रयास करने होंगे।


योग शिक्षा विभाग के डॉ नवीन भट्ट ने कहा कि भाषाओं से राष्ट्रीय एकता बढ़ती है। भाषा ही हमें दूर दूर तक जोड़ती है। हमें देश को बचाये रखने के लिए मातृभाषाओं को संरक्षित करना होगा मातृभाषा ही हमारी उन्नति का मूल है।

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पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के डॉ ललित चंद्र जोशी ने कहा कि संचार में भाषाओं का इगदान है। भाषा ही एक दूसरे से जोड़ती है। यदि भाषाओं के संरक्षण के लिए कार्य नहीं किये गए तो संचार बाधित हो जाएगा। इसलिए हमें भाषा के उन्नयन के लिए कार्य करना होगा। उन्होंने मातृभाषाओं के संबंध में कहा कि मातृभाषों के प्रति हमें झुकाव रखना होगा।


गोष्ठी का संचालन योग के शोधार्थी रजनीश जोशी ने किया। गोष्ठी में रजनीश जोशी, गिरीश अधिकारी, मनोज, दीक्षा आर्या, मनोज पांडे, भावना बिनवाल, रजिया अंसारी, तनुजा आर्या, स्वेता पुनेठा, द्रोपदी बिष्ट, योगेंद्र लटवाल, ज्योति रावत, सपना कार्की, पूजा आर्या आदि शिक्षक सहित विश्विद्यालय के छात्र एवं छात्राएं मौजूद रही।

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