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रास्ते बंद होने के चलते हो रही पेयजल की किल्लत

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सुमित जोशी

सड़क निर्माण से बंद हुआ डुंगरा तोक के गांव मन्यां का पारंपरिक नौले का रास्ता

अल्मोड़ा। डुंगरा ग्रामसभा के तोक मन्यां के ग्रामीण नौले पोखर को जाने वाले रास्ते के लिए पिछले दो वर्ष से बेहद परेशान हैं। इनकी परेशानी का कारण किसी को दिखाई नहीं देता। ग्रामीणों के पास पेयजल के लिए एकमात्र नौला है जो गांव से लगभग एक किलोमीटर दूर तलहटी पर स्थित है। इस नौले तक आवागमन का रास्ता सड़क निर्माण के मलवे से लगभग बंद हो चुका है। ग्रामीणों ने बताया कि एक बार श्रमदान कर इस रास्ते को सुचारू भी किया गया। बावजूद इसके यह रास्ता दोबारा सड़क साफ करने के दौरान बंद कर दिया गया है। इससे ग्रामीणों को पेयजल के लिए अन्य स्रोतों की ओर भटकना पड़ रहा है। इससे उन्हें अतिरिक्त समय और श्रम महज पेयजल आपूर्ति के लिए खर्च करना पड़ रहा है। इसके अलावा अतिरिक्त धन खर्च कर घोड़े और खच्चर में दूर दराज से पेयजल मंगाने को मजबूर होना पड़ रहा है।

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धौलादेवी विकास खंड के दूरस्थ गांव पव्वाखान से जिगोली तोली तक लगभग दो वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत डूंगरा जिगोली तक लगभग नौ किलोमीटर सड़क निर्माण किया गया। निर्माणाधीन सड़क के एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित मन्यां गांव के रास्ते से होते हुए इस सड़क को तैयार किया गया। सड़क निर्माण से मन्यां के ग्रामीणों का पेयजल के लिए नौले तक जाने वाला रास्ता पूरी तरह से मलबे की चपेट में आने से बंद हो गया है।

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तोक मन्यां के ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान मन्यां गांव के 40 परिवारों का पैदल रास्ता जो नौले पोखर तक जाता है उसमें सड़क निर्माण का मलबा समाने से यह लगभग बंद कर हो गया है। ग्रामीणों की शिकायत है कि गांव के लिए जो पारंपरिक नौले का रास्ता बना हुआ था उसे सड़क निर्माण के दौरान तोड़ तो दिया गया लेकिन सुचारू नहीं किया गया है। इसके चलते ग्रामीणों की ओर से संबंधित ठेकेदार के पास बार बार शिकायत के बावजूद वह आंख कान बंद कर सोया पड़ा है। जबकि इस सड़क में अब सोलिंग कार्य के लिए पत्थर भरना भी शुरू कर दिया गया है।

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ग्रामीण श्याम सुन्दर जोशी, गिरीश जोशी, दीप जोशी, कैलाश जोशी, ललित मोहन, नारायण जोशी, विनोद जोशी, भास्कर जोशी, प्रकाश जोशी, दिनेश जोशी, उमेश जोशी, लीलाधर जोशी आदि ग्रामीणों का कहना है यदि उनके गांव के पारंपरिक नौले का रास्ता जल्द सुचारू नहीं किया गया तो वह उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।

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जोखिम भरा है एकमात्र रास्ता


पेयजल के लिए ग्रामीणों को इस जोखिम भरे रास्ते से आना जाना अब मजबूरी बन गई है। इसके चलते गांव के अन्य रास्ते भी बंद हो गये हैं। लोग उपजाऊ खेतो के सहारे चलने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है यदि किसी भी ग्रामीण को इस रास्ते से चलते हुए यदि कोई नुक्सान होता है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।

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नहीं हो रहा है जल स्रोतों का संरक्षण


जल स्रोतों के संवर्धन और संरक्षण के लिए सरकार की ओर से तमाम तरह की योजनाएं चलाई जा रही हैं। लेकिन इस गांव के पारंपरिक नौले पोखर अभी भी संरक्षण के अभाव में बदहाली के कगार पर हैं।

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