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भूलकर कर भी ना करें यह 5 बैंक ट्रांजेक्शन,नही तो पड़ सकता है पछताना

Smriti Nigam
4 Min Read
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आपकी जानकारी के लिए बता दे कि आयकर विभाग केवल ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पर ही नजर नहीं रखता यह कैश के लेनदेन को भी ध्यान में रखता है। अगर आप तय किए गए नियमों का उल्लंघन करते हैं तो आपको आयकर विभाग का नोटिस आ सकता है।

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कई लोगों को लगता है कि अगर वह कैश में ट्रांजैक्शन करेंगे तो इस बारे में आयकर विभाग को नहीं पता चलेगा लेकिन ऐसा नहीं होता है। कुछ ट्रांजैक्शन ऐसे हैं जहां आप बहुत ज्यादा कैश इस्तेमाल करेंगे तो आपको आयकर विभाग का नोटिस आ सकता है। आज हम आपको ऐसे ही पांच ट्रांजैक्शन के बारे में बताने जा रहे हैं। इन 5 ट्रांजेक्शन में सेविंग्स अकाउंट, एफडी, स्टॉक परचेज, क्रेडिट कार्ड का बिल पेमेंट और और प्रॉपर्टी से संबंधित लेनदेन है।

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बचत खाते से
अगर आप अपने किसी सेविंग अकाउंट में 10 लाख से ऊपर का कैश डिपॉजिट करते हैं तो खाताधारक मुसीबत में आ सकता है। सरकार की ओर से यह लिमिट सेट की गई है। 1 अप्रैल से 31 मार्च तक सेविंग अकाउंट में 10 लाख रुपए से ज्यादा कैश नहीं डाल सकते हैं। अगर रकम इससे ऊपर होती है तो बैंक सीबीटी को सूचना दे देती है।

कैश से एफडी
यहां भी सेविंग अकाउंट वाला नियम लागू होता है। अगर कोई वित्त वर्ष में 10 लाख रुपए से ज्यादा का निवेश कैश में करता है तो इनकम टैक्स विभाग उसे नोटिस भेज देता है। अगर आप अलग-अलग अकाउंट में छोटा-छोटा अमाउंट भी जमा करते हैं और यह मिलकर 10 लाख रुपए से अधिक हो जाता है तो भी आप इनकम टैक्स वालों की नजर में आ जाएंगे।

स्टॉक-म्यूचुअल फंड की खरीद
अगर आप स्टॉक, म्युचुअल फंड या बांड में निवेश करते हैं तो भी आप 10 लाख रुपए से अधिक का निवेश नहीं कर सकते। इससे आयकर विभाग जरूर सतर्क हो जाता है लेकिन ऐसा जरूरी नहीं की आपको पहली बार में ही नोटिस आ जाए। अगर विभाग ने इसकी जांच की और कुछ गड़बड़ी पाई तो आप परेशानी में पड सकते हैं।

कैश में क्रेडिट का बिल भुगतान
इस बारे में कोई नियम तय नहीं है कि आप क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान कैश में कर सकते हैं फिर भी अगर आप महीने में एक लाख से ज्यादा का बिल पेमेंट कैश में करते हैं तो आप आयकर विभाग की नजर में आ जाएंगे। इसके बाद वह आपका फंड के स्रोत का पता लगाने में जुट जाएंगे।

प्रॉपर्टी से संबंधित कैश भुगतान
अगर आप कोई प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं और आपको लगता है कि आप सारी पेमेंट कैश में करके आयकर विभाग की नजर से बच जाएंगे तो आप गलत हैं। शहर में 50 लाख रुपये और गांव में 20 लाख रुपये या उससे अधिक की प्रॉपर्टी खरीदने पर आपको आयकर विभाग को बताना होता है कि इतने फंड का इस्तेमाल कहां हो रहा है. कई राज्य इस मामले में अपने अलग नियम भी बनाते हैं।