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जंगलों में आग का तांडव, 5 लोगों की मौत, 1196 हेक्टेयर वन क्षेत्र खाक

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उत्तराखंड के जंगलों में आग का तांडव जारी है। राज्य में अब तक आग लगने की 930 से ज़्यादा घटनाएँ हो चुकी हैं जिनमें 1,196 हेक्टेयर से ज़्यादा वन क्षेत्र जलकर खाक हो गया है। भीषण आग की चपेट में आकर अब तक पाँच लोगों की मौत हो चुकी है जबकि चार लोग झुलस गए हैं।

गौरतलब हो, आग लगने की सबसे ज़्यादा 491 घटनाएँ कुमाऊँ मंडल और 365 घटनाएँ गढ़वाल मंडल में हुई हैं। इसके अलावा 74 मामले वन्यजीव क्षेत्रों में आग लगने के हैं। आग की स्थिति सबसे ज़्यादा गंभीर पौड़ी और अल्मोड़ा ज़िलों में है जहाँ आग बुझाने के लिए NDRF की टीमें तैनात की गई हैं।

राज्य सरकार ने जंगलों की आग से निपटने के लिए एक एक्शन प्लान तैयार किया है। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने बताया कि आग बुझाने के काम में पीएसी, होमगार्ड, पीआरडी, युवक और महिला मंगल दल, स्थानीय संगठनों और आम लोगों की मदद ली जाएगी। सरकार क्लाउड सीडिंग के ज़रिए कृत्रिम बारिश कराने पर भी विचार कर रही है। जंगल में जानबूझकर या लापरवाही से आग लगाने वालों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी। बार-बार आग लगाने वालों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई होगी और वन संपदा को हुए नुक़सान की भरपाई भी उनसे करवाई जाएगी। पुलिस और वन विभाग ने अब तक आग लगाने के मामले में सैकड़ों मुक़दमे दर्ज किए हैं।

बता दें, जिन इलाक़ों में ज़्यादा आग लगी है, वहाँ पानी के छोटे पोर्टेबल टैंकर और आग बुझाने वाले छोटे सिलिंडरों की व्यवस्था की जाएगी। स्कूलों और कॉलेजों में बच्चों को वनाग्नि की रोकथाम के बारे में जागरूक किया जाएगा। जिन गाँवों के लोगों ने अपने आस-पास के जंगलों को आग से बचाया है, उन्हें सरकार पुरस्कृत करेगी।

राज्य में पराली और कूड़ा जलाने पर रोक लगा दी गई है। वन विभाग के फ़ायर वॉचर्स का बीमा अगले दो-तीन दिनों में करा दिया जाएगा। चारधाम यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए आपदा प्रबंधन विभाग ने त्वरित प्रतिक्रिया दल तैनात किए हैं। वन मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाकर ज़िलों में तैनात किया गया है जो वनाग्नि की घटनाओं की निगरानी करेंगे।