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विद्यार्थी कर रहे तुलसी व्रत का वैज्ञानिक अध्ययन तो नातक, सूतक की वैज्ञानिक विवेचना भी

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पिथौरागढ़। जनपद के कनालीछीना विकास खंड के राजकीय जूनियर हाईस्कूल कमतोली के छात्र – छात्राएं इन दिनों गांव में प्रचलित परम्पराओं को विज्ञान से जोड़कर समाज की रूढ़ियों को तोड़ने और सामाजिक संचेतना जाने का प्रयास कर रहे हैं।

गांव के लोगों से पूछ-पूछकर वे किसी विशेष प्रथा के विषय में जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। इसी क्रम में तुलसी व्रत पारायण प्रथा का वैज्ञानिक अध्ययन कर रही छात्रा निशा का मानना है कि तुलसी को एक ही रोपना और पुष्ट होने पर उद्‌यापन करने की परंपरा को एक साथ मनाना हमारे पुरखों की देन है। इसे धर्म और संस्कृति से जोड़ने की यह मंशा रही होगी कि इस बहाने इस पौधे को सभी लोग रोप सकें।

बताया गया कि तुलसी के पौधे में पोषक तत्व, रोग प्रतिरोधक पदार्थ और कीटनाशी गुण होने के कारण इसे शुद्ध माना गया। छात्रा निशा व ज्योति ने सर्वे, प्रश्नावली और दार्शनिक शोध विधियों का प्रयोग कर अपना प्रोजेक्ट बनाया है। इसको तैयार करने में विभिन्न विशेषज्ञों की सहायता ली गयी है।

वहीं छात्र दिव्यांशु भट्ट व मनीष भट्ट ने मिलकर समाज में नातक, सूतक तथा मासिक धर्म के दौरान क्वारंटीन होने की परंपरा की वैज्ञानिक विवेचना की है। दिव्यांशु ने अपने अध्ययन में पाया कि इन चीजों में अन्धविश्वास अधिक है। दूध या दूध से निर्मित पदार्थों को न खाना मिथक है। अपनी शोध परियोजना में इन छात्रों ने अध्ययन किया कि गोमूत्र प्रयोग की प्रथाएं इसलिए प्रचलित हैं, क्योंकि गोमूत्र में पोषक तत्व और रोगनाशक तत्व पाए जाते हैं।

आश्विन संक्रान्ति को छिलके की मशाल व अलाव के गुणों पर शोध परियोजना में मुकेश चन्द्र भट्ट व ललित पाठक कार्य कर रहे हैं। छिलके के एरोमैटिक गुण को कीटनाशक बताया गया है। ये छात्र विभिन्न स्रोतों से जानकारी जुटा रहे हैं। इस अध्ययन के लिए उन्होंने कृषि एवं पादप वैज्ञानिक डॉ. हेमन्त पाण्डेय, डॉ. वन्दना पाण्डेय, डॉ. टीएस सिरौला, जीव विज्ञानी डा एस मण्डल से जानकारी जुटाई है।

मुवानी डिग्री कालेज के प्राचार्य डॉ गिरीश चन्द्र पंत, एमबी पीजी कालेज हल्द्वानी के शिक्षा संकाय के प्रो डॉ टीसी पाण्डेय ने भी इन नन्हे शोधकर्ताओं को आवश्यक जानकारी व मार्गदर्शन दिया है। इस कार्यक्रम की संयोजक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका लीलाधामी तथा इन बाल वैज्ञानिकों के मार्गदर्शक शिक्षक डा सीबी जोशी हैं। जल्दी ही जीव विज्ञानी डॉ कमलेश भाकुनी, डॉ रेनू जोशी व प्रो विनोद पाण्डेय इन्हें आवश्यक मागदर्शन देंगे। बच्चों के कार्यों की विज्ञान संयोजक डॉ विकास पंत व पूर्व जिला समन्वयक डा दीपक कापड़ी ने सराहना की है।

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