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अल्मोड़ा: जंगलों के कटने और आग से बचाने की अपील के साथ पर्यावरण संस्थान के निदेशक से मिले लोग, जंगल बचाने को शीतलाखेत मॉडल अपनाने का आह्वान

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Almora: People met the Director of Environment Institute with an appeal to save forests from deforestation and fire

अल्मोड़ा, 14 फरवरी 2024- जंगलों को आग से बचाने और उनके संरक्षण के लिए शीतलाखेत क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने जीबी पंत पर्यावरण संस्थान के निदेशक प्रोफेसर सुनील नौटियाल, वरिष्ठ वैज्ञानिक आई डी भट्ट से मुलाक़ात की।

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इस दौरान प्रतिमंडल ने संस्थान के वैज्ञानिकों को पत्र सौंपा और ग्लोबल वार्मिंग कृत जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पन्न चुनौतीयों से निपटने में जंगलों की महत्वपूर्ण भूमिका के चलते उत्तराखंड के जंगलों के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु शीतलाखेत मॉडल के प्रचार एवं प्रसार का अनुरोध किया।


पत्र में जनसहभागिता से जंगलों का संरक्षण एवं संवर्धन किए जाने, एएनआर पद्धति से नये जंगल विकसित किये जाने,ग्रामीणों को विकल्प देकर जंगलों पर दबाव कम करना -वी एल स्याही हल के उपयोग को प्रेरित करना। तथा जंगलों को वनाग्नि से सुरक्षित रखने हेतु ग्राम सभा स्तर पर वनाग्नि समिति का गठन और 1 अप्रैल को ओण दिवस का आयोजन करने का अनुरोध किया।

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People met the Director of Environment Institute with an appeal to save forests from deforestation and fire


प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग कृत जलवायु परिवर्तन से उत्तराखंड के जलस्रोतों, जैव विविधता, खेती बागवानी पर पड़ रहे विपरीत प्रभावों को स्पष्ट रूप से देखा महसूस किया जा सकता है।


कहा कि इस साल फ़रवरी माह के मध्य काल तक शीतकालीन वर्षा और बर्फबारी ना होना रबी फसलों, बागवानी के लिए बड़ी चिंता का विषय होने के साथ साथ आने वाली गर्मियों में गंभीर पेयजल संकट का कारण बन सकता है।
कहा कि वर्तमान जलवायु परिवर्तन के मूल में मानवीय गतिविधियों के कारण जंगलों का जलना और कटना, अत्यधिक मात्रा में पेट्रोकेमिकल पदार्थों के जलने से निकलने वाली ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन है जलवायु परिवर्तनकी चुनौती का सामना करने में जंगल हमारे सबसे बड़े सहयोगी हैं गंगा, यमुना जैसी राष्ट्रीय महत्व की नदियों का उदगम स्थल होने के कारण भी उत्तराखंड के जंगलों को कटने, जलने से बचाना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि स्याही देवी शीतलाखेत क्षेत्र में वन विभाग और जनता के परस्पर तालमेल से पिछले 20 वर्षों से चलाये जा रहे जंगल बचाओ जीवन बचाओ अभियान से निकले निम्नलिखित 4 मॉडल उत्तराखंड और अन्य हिमालयी राज्यों के जंगलों के संरक्षण एवं संवर्धन में मददगार साबित हो सकते हैं, जिनमें जनसहभागिता से जंगलों का संरक्षण एवं संवर्धन,एएनआर पद्धति से नये जंगल विकसित किया जाना,ग्रामीणों को विकल्प देकर जंगलों पर दबाव कम करना औरजंगलों को वनाग्नि से सुरक्षित रखने हेतु ग्राम सभा स्तर पर वनाग्नि समिति का गठन और 1 अप्रैल को ओण दिवस का आयोजन करने की अपील की
प्रतिनिधिमण्डल में आरडी जोशी, गोपाल बिष्ट, प्रताप सिंह, शंकर सिंह और गजेंद्र पाठक शामिल थे।