Former Chief Minister Harish Rawat ने 11 मई तक के अपने कार्यक्रम किए जारी, 6 दिन विभिन्न मुद्दों को लेकर करेंगे धरना, उपवास

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Former Chief Minister Harish Rawat continues his programs till May 11, will sit for 6 days on various issues, fast

अल्मोड़ा, 24 अप्रैल 2023- पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत(Former Chief Minister Harish Rawat) ने आगामी मई माह के 11 तारीख तक के कार्यक्रम जारी कर दिए हैं। इन कार्यक्रमों में 6 दिन उन्होंने धरना प्रदर्शन के लिए रखे हैं।

Former Chief Minister Harish Rawat
Former Chief Minister Harish Rawat

हरीश रावत ने सोशल मीडिया में अपने कार्यक्रमों की जानकारी शेयर की है। Former Chief Minister Harish Rawat कहा है कि —–


” 1 तारीख, मजदूर दिवस के कार्यक्रमों में भाग लूंगा, फिर कुछ शादियां हैं, कुछ पारिवारिक कार्यक्रम हैं, 4 और 5 तारीख को अल्मोड़ा में शिल्प उन्नयन संस्थान के निर्माण की उपेक्षा को लेकर रात और दिन का धरना दूंगा। 6 मई को मोहनरी में “काफल मेला”। 9 मई को 24 घंटे का इकबालपुर चीनी मिल के सामने “उपवास कम धरना” और उसके बाद 11 मई को “कांग्रेस से जुड़ो” अभियान कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत ढंढेरा से नगला इमरती तक करूंगा, इसी दिन रुड़की पनियाला मोटर मार्ग की दुर्दशा को लेकर आधे घंटे के लिए यातायात बाधित करूंगा, फिर इसी प्रकार कार्यक्रमों का लगातार सिलसिला है। मेरे किसी शुभ चिंतक ने पूछा कि इतना क्यों ? मैं भी कभी-कभी अपने मन में सवाल करता हूं कि इतना सब कुछ क्यों? फिर मेरा ही मन कहता है यदि आज नहीं तो फिर कब? कांग्रेस के अपने कार्यकर्ताओं से विशेष तौर पर वरिष्ठ पदों पर रह चुके लोगों से एक अलग प्रकार की अपेक्षा है। मगर कुछ उत्तराखंड के लोगों की भी अपेक्षा है। महंगाई के साथ बिजली, पानी, हाउस टैक्स और भूमि के सर्किल रेट, सब चीजों की बढ़ती हुई दरें जले में नमक का काम कर रही हैं। नल हैं तो पानी नहीं, स्कूल हैं तो अध्यापक नहीं, चिकित्सालयों में डॉक्टर नहीं हैं, सड़कों में जगह-जगह पर गड्ढे ही गड्ढे दिखाई दे रहे हैं, बिजली कटौती रोजमर्रा की बात हो गई है, घंटो का ट्रैफिक जाम हमारी पहचान बनता जा रहा है, एक अजीब सी स्थिति है उत्तराखंड में! कांग्रेस इन मुद्दों पर लगातार लड़ रही है, मगर जिस प्रकार से आज 20-20 मैच में इंपैक्ट प्लेयर की बात कही जा रही है तो कुछ राजनीतिक पदों पर रह चुके लोगों को इंपैक्ट प्लेयर के तौर पर भी काम करना चाहिए, ताकि वो एक नैतिक दबाव राज्य सरकार व प्रशासन पर पैदा कर सकें। आखिर ये बेरोजगार नौजवान किसकी तरफ देखेंगे! शायद ही कोई दिन ऐसा नहीं जाता है जब मैं देहरादून होता हूं, तो जिस दिन उतनी दूरी से चलकर के बेरोजगार लड़के-लड़कियों का कोई न कोई ग्रुप आकर के अपने भविष्य को लेकर शिकायत करता है। दूसरी तरफ उपनल के माध्यम से कार्यरत नौजवान एक अनिश्चित भविष्य के भंवर में फंसे हुए हैं, उन्हीं की तरीके से अतिथि शिक्षक भी हैं और भी बहुत सारे नौजवान/लोग हैं जो कहने को राजकीय सेवाओं में हैं, मगर एक अनुच्छेद भविष्य के धुधलके में उनको कुछ दिखाई ही नहीं दे रहा है। प्राइवेट्स कंपनियों में निरंतर कर्मचारियों की छटनी हो रही है, जहां छटनी नहीं हो रही है वहां लोगों को विवश किया जा रहा है कि वह कम वेतन पर काम करें, चारों तरफ उनका शोषण हो रहा है। शराब का आलम यह है कि हाईकोर्ट को कहना पड़ रहा है कि शराब का टैट्रा पैक नहीं चलेगा, पर्यावरण के लिए खतरा पैदा हो जाएगा। शराब के जितने आउटलेट हैं उससे कई गुना ज्यादा अब सब आउटलेट्स नई पॉलिसी के अंतर्गत काम करेंगे, ताकि गांव-गांव में एक शराब का आउटलेट बन जाए। भ्रष्टाचार का आलम भी चिंताजनक है। एक पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कमीशन का प्रतिशत पहले से दो गुना हो गया है। सरकार की तरफ से कोई खंडन नहीं आया! गन्ना किसान अपमान का घूंट पीकर बैठा हुआ है। चीनी के दाम दुनिया में आसमान पर और उत्तराखंड में गन्ना किसान बेबस है कि पुरानी दर पर ही अपने गन्ने को बेचने के लिए, इकबालपुर और काशीपुर की चीनी मिलों से सेवित किसानों का वर्षों का बकाया है, उसका भुगतान नहीं हो पा रहा है। फसलों को जो नुकसान पहुंचा, उसकी कोई देखरेख करने वाला नहीं है, जंगलों में बंदर, सूअर, जड़ाऊ, आदि ये सब तो थे ही थे, अब आग और बाघ रही सही कसर पूरी कर रहे हैं, राज्य का एक भाग निरंतर पलायनित हो रहा है, जोशीमठ को लेकर कोई ठोस योजना नहीं है, प्राकृतिक आपदा पीड़ितों को सहायता के नाम पर अभी तक सरकार केवल ठेंगा दिखा रही है, अंकिता हत्याकांड के मुख्य अभियुक्त वीआईपी को सरकार खोजना ही नही चाहती है, फेहरिस्त लंबी है इसलिये परिस्थितियां पुकारती हैं कि तुम्हारा कर्तव्य क्या है? इसलिए मैंने तय किया है कि मैं शक्ति संजोउंगा और छोटी-छोटी कांग्रेस से जुड़ो यात्राएं प्रारंभ करूंगा। देखता हूं एक इंपैक्ट प्लेयर का रोल ठीक से अदा कर पाता हूं या नहीं कर पाता हूं। जनता ने तो बोली लगाई ही नहीं, लेकिन फिर भी विपक्ष की टीम उत्तराखंड के लिए हाजिर हूं, जो भी हौसला मुझ में है वो उत्तराखंड को समर्पित है।
(यह शब्द हरीश रावत ने अपने सोशल मीडिया पेज पर लिखे हैं वहीं से संकलित हैं)

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