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Haldwani- सफाई कर्मचारियों को काम से निकालने पर भड़के उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कर्मचारी

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हल्द्वानी। 14 मार्च 2022- हल्द्वानी स्थित उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में दो सफाई कर्मचारियों को बिना वजह निकालने और छह कर्मचारियों को नियमित किये जाने की फाइल दबा दिये जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस बात से नाराज़ कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय में कार्य बहिष्कार कर नारेबाज़ी की और प्रदर्शन किया, जिस वजह से विश्वविद्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

मामले को शांत करने के लिए विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने दो बार धरना स्थल पर आकर कर्मचारियों के सामने मांगें पूरी ना कर पाने को लेकर प्रशासन की मजबूरी रखी लेकिन कर्मचारियों ने दो टूक जवाब दे दिया कि अब वे गुमराह नहीं होंगे।

आंदोलनरत कर्मचारियों ने बताया कि कुछ दिनों पहले दो सफाई कर्मचारियों सचिन कुमार और रीना देवी को बहाने बनाकर नौकरी से निकाल दिया गया। इसके अलावा तीन कर्मचारियों मोहन बवाड़ी, दिनेश कुमार और सत्येंद्र रावत की विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की स्वीकृति के बाद भी नियुक्ति नहीं दी गई है। कुलसचिव से दिन में दो बार हुई बातचीत में कर्मचारियों ने कहा कि जब बाक़ी पदों पर कार्य परिषद की मोहर लगते ही नियुक्ति दे दी जाती है परन्तु इन कर्मचारियों के लिए शासन से स्वीकृति का बहाना क्यों बनाया जा रहा है। इसके अलावा एक कर्मचारी नवीन जोशी से बार-बार ड्राइवर का काम लेने के बाद भी उन्हें ड्राइवर के पद पर नियुक्ति ना देने पर नाराज़गी ज़ाहिर की।

बताया गया कि उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय शिक्षणेत्तर कर्मचारी संगठन पिछले दो महीने से लगातार विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन देकर अपनी मांगे रखता आ रहा है। संगठन के नेतृत्व में 60 कर्मचारियों की तरफ़ से भेजे गये इस ज्ञापन में कहा था कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे कार्य बहिष्कार करेंगे। कर्मचारी अपनी दस सूत्रीय मांगों पर अड़े हुए हैं, इसमें समान काम के बदले समान वेतन के अलावा विश्वविद्यालय की शुरुआत से ही काम कर रहे जगत सिंह, दिनेश फुलारा और छाया देवी को बाक़ी कर्मचारियों की तरह तुरंत नियमित करने और सभी के लिए स्वास्थ्य बीमा की भी बात उठायी गई है।

साथ ही दैनिक भोगी कर्मचारियों को भी समायोजित करने की मांग दोहरायी गई। कर्मचारी संगठन ने घोषणा की है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी आंदोलन जारी रहेगा।

शाम होते-होते कुलसचिव की तरफ़ से विंदुवार तरीक़े से सभी मांगों पर हाथ खड़े करते हुए सफाई दी गई और कर्मचारियों पर दबाव बनाने के लिए अनुशासन का वास्ता दिया गया। कर्मचारियों को ये बात नागवार गुजरी कि दैनिक भोगी कर्मचारियों को विश्वविद्यालय कभी भी निकाल सकता है। बताया गया कि वर्तमान में विश्वविद्यालय में क़रीब 30 दैनिक भोगी कर्मचारी हैं। कर्मचारी संघ ने कहा कि इस तरह की धमकी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इस मौक़े पर कर्मचारी संघ अध्यक्ष राजेश आर्या ने कहा है कि वे लंबे अरसे से कर्मचारियों की जायज़ मांगों को उठा रहे हैं लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन अर्थहीन बहाने बनाकर कर्मचारियों को गुमराह कर रहा है। विश्वविद्यालय में अब तक दो कर्मचारियों की मौत हो चुकी है लेकिन ना तो उनके आश्रितों को नौकरी दी गई और ना ही उन्हें कोई मुआवजा दिया गया।

शिक्षक संघ अध्यक्ष भूपेन सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय में नियमों को तोड़कर कई फर्जी भर्तियां की गई हैं, जबकि ईमानदार शिक्षकों और कर्मचारियों का उत्पीड़न करने की कोशिश की जा रही है। शिक्षक संघ महासचिव राजेंद्र कैड़ा ने कहा कि कर्मचारियों की मांगों को तुरंत पूरा किया जाना चाहिए।

इस मौक़े पर बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय के कर्मचारी मौजूद थे. सभी ने एक सुर में कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी आंदोलन वापस नहीं होगा। कर्मचारी नेता राजेश आर्या के अलावा, योगेश मिश्रा, पंकज बिष्ट, मोहन बवाड़ी, छाया देवी, जगत बंगारी, मोहन जोशी, राहुल नेगी आदि ने भी सभा को संबोधित किया।

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