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Mumps Symptoms: केरल में पैर पसार रही है मम्प्स की खतरनाक बीमारी, जाने इसके लक्षण और बचाव

What Is Mumps: केरल में मम्प्स का वायरस तेजी से फैल रहा है। बताया जा रहा है कि 1 दिन में इसके लगभग 190 मामले…

What Is Mumps: केरल में मम्प्स का वायरस तेजी से फैल रहा है। बताया जा रहा है कि 1 दिन में इसके लगभग 190 मामले मिले हैं। इसकी चपेट में कोई भी आ सकता है। ऐसे में यह बीमारी और इसके लक्षण को समझना बहुत जरूरी है।

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Mumps Outbreak in Kerala: केरल में मम्प्स जिसे गलसुआ भी कहा जाता है काफी तेजी से फैल रहा है। राज्य में इसके 190 मामले मिले हैं। वहीं केरल के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस महीने वायरल संक्रमण के 2505 और इस साल दो महीनों में 11,467 मामले सामने आए हैं। जिसके बाद हेल्थ मिनिस्ट्री की तरफ से नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल को इस राज्य में अलर्ट होने के आदेश जारी किए गए हैं।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इस बीमारी से बचाव के लिए खुद का जागरूक होना जरूरी है क्योंकि यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बहुत तेजी से फैल रही है। ऐसे में यहां हम आपको इस बीमारी से जुड़ी जानकारी बताएंगे।

क्या है मम्प्स

मायो क्लिनिक के अनुसार, मम्प्स या गलसुआ एक तरह का वायरल इंफेक्शन होता है, जो दोनों गालों के साइड मौजूद सलाइवा बनाने वाले पैरोटिड ग्लैंड को इफेक्ट करता है। यह इंफेक्शन छींक या खांसी, किस करने और जूठा पानी पीने से एक व्यक्ति से दूसरे में पहुंचता है। यह इंफेक्शन आमतौर पर बच्चों में ज्यादा होता है लेकिन इसकी चपेट में किसी भी उम्र का व्यक्ति आ सकता है।

मम्प्स में दिखते हैं ये लक्षण

इस बीमारी में गर्दन के पास सूजन के साथ दर्द होता है। खाना चबाने में भी कठिनाई होती है।
बुखार आ जाता है।
सर में दर्द रहता है।
मांसपेशियों में दर्द रहता है।
लगातार थकान महसूस होती है।
भूख नहीं लगती है।

क्या मम्प्स से जान जा सकती है

सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन के अनुसार, कुछ मामलों में यह पाया गया है कि यह बीमारी बहुत गंभीर रूप भी ले लेती है। इसमें बच्चों में बहरापन और ब्रेन में सूजन हो जाती है जिससे मरीज की मौत हो सकती है। हालांकि ऐसे मामले बहुत रेयर होते हैं।

क्या है उपचार

इस इंफेक्शन का कोई इलाज नहीं है। वैसे तो बेड रेस्ट और हेल्दी डाइट, लिक्विड इनटेक के साथ यह इंफेक्शन 3-10 दिन में खुद-ब-खुद ठीक हो जाता है। ऐसा ना होने पर लक्षण के आधार पर मरीज का इलाज किया जाता है। 

कैसे करें बचाव

इस बीमारी से बचाव करना बहुत जरूरी है। इसके लिए आप किसी का जूठा ना खाए ना पिए। इसके साथ ही खांसते या छींकते समय लोगों से दूर रहे। इसके साथ ही एमएमआर (मम्प्स- मीसल्स, रूबेला) वैक्सीन लगवाएं। इस वैक्सीन को 12-15 महीने की उम्र के बाद कभी भी लगवा सकते हैं। चूंकि बच्चों में यह बीमारी ज्यादा होती है इसलिए बचपन में ही वैक्सीनेशन करवा लेना फायदेमंद होता है।