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अब उत्तराखंड में नहीं ले पाएंगे, पैरासिटामौल व सिटराजिन

बुखार या जुकाम होने पर बेझिझक ली जाने वाली पैरासिटामौल, सिटराजिन व अन्य काँमन दवाओं को अब आप नहीं खरीद सकते हैं जेब मे डाक्टर के ऱूप में जानी जाने वाली ही 434 दवाओं को उत्तराखंड में बैन कर दिया गया है जनहित याचिका में हाइकोर्ट ने यह आदेश दिए हैं साथ ही राज्य सरकार से प्रभावी कदम उठाने को कहा है।


न्यायालय ने राज्य में नशे को रोकने के लिए सभी शिक्षण संस्थानों, निजी संस्थानों और अन्य सार्वजनिक स्थानों में उच्च शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में ड्रग्स कंट्रोल क्लब खोलने के आदेश भी दिए हैं।


जिन दवाओं को प्रतिबंधित किया गया है उनमें बुखार की पैरासिटामौल, सिट्राजिन, टेराफिनाडीन, डीकोल्ड टोटल, सेराडॉन, फिंसाडीन, डोवर्स पावडर, दर्द की डाईक्लोफिनेक , पेरासिटामोल डोवोर्स टेबलेट व काँम्बिफ्लेम मुख्य हैं न्यायालय ने प्रदेश में 434 दवाओं की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह प्रतिबंध राज्य के युवाओ का नशे की गर्त में जाने के खिलाफ दायर याचिकी के बाद सुनाया रामनगर नैनीताल निवासी श्वेता मासीवाल ने यह जनहित याचिका दायर की थी याचिका में सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की अदालत ने दिये। खंडपीठ ने किशोर न्याय अधिनियम की धारा 77 जे जे में विस्तार करते हुए 18 साल से कम उम्र के बच्चों को प्रतिबंधित दवाइयां, मादक पदार्थ और नशा होने की आशंका वाली किसी भी दवा-चीज की बिक्री पर भी रोक लगा दी है।

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खंडपीठ ने राज्य सरकार को केंद्रीय औषधि नियंत्रक बोर्ड द्वारा प्रतिबंधित की गयी सभी 434 दवाओं की बिक्री पर पूर्ण रूप से रोक लगानेके आदेश दिए हैं पीठ ने कहा कि जिस किसी मेडिकल स्टोर में ये दवाईया उपलब्ध हैं उनको पुलिस की मदद से या तो नष्ट किया जाए, अथवा इन्हें इनकी कम्पनी को वापस किया जाए।
राज्य व जनपदाें की सीमाओं पर ड्रग्स की जांच करने के लिए सरकार 3 सप्ताह में विशेष टीम गठित करने को भी कहा गया है। प्रदेश के प्रत्येक जिले में नशा मुक्ति केंद्र खोलने के निर्देश देते हुए राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर ड्रग्स नारकोटिक्स स्क्वाड का गठन करने को भी कहा गया है।

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