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ट्रंप सरकार का बड़ा कदम: भारत समेत 16 देशों के खिलाफ ‘सेक्शन 301’ के तहत व्यापार जांच शुरू

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने वैश्विक व्यापार जगत में खलबली मचा दी है। अमेरिका ने ‘सेक्शन 301’ के तहत एक साथ 16 बड़े…

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने वैश्विक व्यापार जगत में खलबली मचा दी है। अमेरिका ने ‘सेक्शन 301’ के तहत एक साथ 16 बड़े देशों के खिलाफ व्यापारिक जांच (Trade Probe) शुरू करने का आदेश दिया है। इस जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या इन देशों की नीतियां अमेरिकी व्यापार को नुकसान पहुँचा रही हैं।

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जांच के घेरे में आए 16 देशों/क्षेत्रों की सूची:
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जैमीसन ग्रीर के अनुसार, इन 16 देशों पर ‘अतिरिक्त औद्योगिक क्षमता’ और ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ का संदेह है:

भारत (India) 🇮🇳
चीन (China) 🇨🇳
यूरोपीय संघ (European Union – EU) 🇪🇺
जापान (Japan) 🇯🇵
दक्षिण कोरिया (South Korea) 🇰🇷
मैक्सिको (Mexico) 🇲🇽
ताइवान (Taiwan) 🇹🇼
वियतनाम (Vietnam) 🇻🇳
थाईलैंड (Thailand) 🇹🇭
मलेशिया (Malaysia) 🇲🇾
सिंगापुर (Singapore) 🇸🇬
इंडोनेशिया (Indonesia) 🇮🇩
बांग्लादेश (Bangladesh) 🇧🇩
कम्बोडिया (Cambodia) 🇰🇭
स्विट्जरलैंड (Switzerland) 🇨🇭
नॉर्वे (Norway) 🇳🇴

प्रमुख बिंदु
गौर करने वाली बात यह है कि अमेरिका का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार कनाडा इस सूची में शामिल नहीं है। बताया जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन का लक्ष्य जुलाई 2026 तक इस जांच को पूरा कर नए टैरिफ (आयात शुल्क) लागू करना है।


क्यों शुरू हुई यह जांच?
अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि ये देश अपनी व्यापार नीतियों और कर प्रणालियों (जैसे डिजिटल सर्विस टैक्स) के जरिए अमेरिकी कंपनियों के साथ भेदभाव कर रहे हैं। यदि जांच में यह साबित होता है, तो अमेरिका इन देशों से आने वाले सामान पर दंडात्मक आयात शुल्क (Punitive Tariffs) लगा सकता है, जिससे इन देशों का निर्यात महंगा हो जाएगा।


भारत के लिए क्या है इसके मायने?
भारत के लिए यह खबर चिंताजनक है क्योंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। आईटी सेवाओं और कपड़ों जैसे उत्पादों पर यदि टैरिफ बढ़ता है, तो भारतीय निर्यातकों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
क्या होगा इसका असर: वैश्विक शेयर बाजारों में इस खबर के बाद हलचल बढ़ सकती है। तो वही जानकारों का मानना है कि भारत और चीन जैसे देश इसके बदले में अमेरिकी उत्पादों पर ‘जवाबी टैरिफ’ लगा सकते हैं।