क्या है अमेरिकी व्यापार नीति का ‘सेक्शन 301’ और क्यों फंसा है इसमें भारत?

अमेरिकी व्यापार नीति का ‘सेक्शन 301’ इस समय पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कानून…

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अमेरिकी व्यापार नीति का ‘सेक्शन 301’ इस समय पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कानून का इस्तेमाल करते हुए भारत समेत 16 देशों के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर यह ‘सेक्शन 301’ क्या है और भारत के लिए यह खतरे की घंटी क्यों है।

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क्या है ‘सेक्शन 301’?
‘सेक्शन 301’ अमेरिका के ट्रेड एक्ट 1974 का एक हिस्सा है। यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को यह शक्ति देता है कि यदि कोई दूसरा देश अमेरिकी सामान पर भारी टैक्स लगाता है या अमेरिकी कंपनियों के साथ भेदभाव करता है, तो अमेरिका उस देश के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई कर सके।
इस कानून के तहत अमेरिका संबंधित देश पर भारी इंपोर्ट ड्यूटी (Import Duty) लगा सकता है या उनके व्यापारिक फायदों को खत्म कर सकता है।


भारत इस जाल में कैसे फंसा?
अमेरिका और भारत के बीच पिछले कुछ समय से ‘डिजिटल सर्विस टैक्स’ (Digital Service Tax) और ‘इंपोर्ट टैरिफ’ को लेकर मतभेद चल रहे हैं। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि भारत द्वारा अमेरिकी टेक कंपनियों (जैसे Google, Amazon) पर लगाया गया टैक्स भेदभावपूर्ण है। भारत में अमेरिकी सामान (जैसे हार्ले डेविडसन बाइक या फल) पर लगने वाला ड्यूटी चार्ज बहुत ज्यादा है।भारत की बौद्धिक संपदा (IPR) नीतियां अमेरिकी व्यापार के अनुकूल नहीं हैं।


भारत पर क्या होगा इसका असर?
यदि ‘सेक्शन 301’ के तहत जांच भारत के खिलाफ जाती है, तो आईटी सेक्टर पर फर्क पड़ेगा। भारतीय सॉफ्टवेयर और आईटी सेवाओं पर अमेरिका अतिरिक्त शुल्क लगा सकता है।वही अमेरिका को निर्यात होने वाले भारतीय कपड़ों और गहनों की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे निर्यातकों को नुकसान होगा। निर्यात घटने से संबंधित उद्योगों में नौकरियों पर संकट आ सकता है।


क्विक इनसाइट्स:
इतिहास: अमेरिका पहले भी चीन के खिलाफ इस कानून का इस्तेमाल कर ‘ट्रेड वॉर’ शुरू कर चुका है।
भारत का कहना है कि उसकी नीतियां उसके अपने विकास और नियमों के अनुसार हैं और वह किसी भी देश के साथ भेदभाव नहीं कर रहा है।