तृणमूल कांग्रेस (TMC) में हुई बड़ी बगावत के बाद 28 में से 20 लोकसभा सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय की घोषणा कर दी है। इस सियासी भूचाल के बीच NCPI अचानक देशभर में चर्चा का विषय बन गई है।
दिलचस्प बात यह है कि जिस पार्टी में 20 बागी सांसदों ने विलय किया है, उस पार्टी का अपना चुनावी नारा था- “अपने अधिकारों को बचाने के लिए दलबदलुओं को नकारें।” बागी सांसदों ने रविवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर संसद में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है। स्पीकर से मुलाकात से पहले इन सांसदों ने बंगाल भाजपा प्रभारी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ भी बैठक की थी।
पति-पत्नी ने 3 साल पहले रखी थी नींव
रिकॉर्ड के अनुसार, NCPI की स्थापना महज 3 साल पहले (2023 में) पश्चिम बंगाल के उत्तिया कुंडू और शेउली कुंडू नाम के एक दंपति ने की थी। पार्टी के आधिकारिक दस्तावेजों में उत्तिया कुंडू अध्यक्ष हैं, जबकि उनकी पत्नी शेउली का नाम कोषाध्यक्ष के तौर पर दर्ज है। पश्चिम बंगाल के हावड़ा के बानीपुर इलाके में पार्टी का रजिस्टर्ड ऑफिस है, जहां सोमवार को भारी सुरक्षाबलों की तैनाती देखी गई।
पार्टी अध्यक्ष उत्तिया कुंडू ने अपने ऑफिस के गेट पर खुद को एक बंगाली अखबार का संपादक और शिक्षक बताया है, वहीं उनकी पत्नी शेउली कलकत्ता हाईकोर्ट में वकील हैं। उत्तिया ने 13 मई को फेसबुक पर बंगाल के CM शुभेंदु अधिकारी के साथ फोटो शेयर कर उन्हें मुख्यमंत्री बनने पर बधाई दी थी।त्रिपुरा से की थी चुनावी शुरुआत, मिले थे सिर्फ 1,198 वोटNCPI ने अपना पहला बड़ा चुनावी दांव 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में खेला था, जहां उसने चार उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। हालांकि, पार्टी का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। इसके उम्मीदवार या तो ‘NOTA’ से पीछे रहे या उससे थोड़े ही ज्यादा वोट हासिल कर सके। पूरी पार्टी को राज्य में कुल मिलाकर मात्र 1,198 वोट मिले थे।
चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक, पार्टी को कुल ₹1.13 लाख का चंदा प्राप्त हुआ था।त्रिपुरा के चावामानु से NCPI के उम्मीदवार रहे बरजेडा त्रिपुरा (जिन्हें मात्र 536 वोट मिले थे) पेशे से दिहाड़ी मजदूर हैं और चुनाव के बाद से उनका पार्टी से कोई संपर्क नहीं है। इसी तरह कैलाशहर से उम्मीदवार रहे जहांगीर अली ने बताया कि चुनाव खत्म होने के बाद पार्टी ने अपनी गतिविधियां पूरी तरह बंद कर दी थीं।
संसद में अलग गुट की मांग
TMC के बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से संसद में अलग बैठने की जगह देने की आधिकारिक मांग की है।बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार के मुताबिक, नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी (NCPI) प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में NDA को अपना समर्थन देगी। बागी गुट का दावा है कि उनके पास TMC के दो-तिहाई (2/3) लोकसभा सांसदों का स्पष्ट समर्थन मौजूद है।दूसरी ओर, ममता बनर्जी गुट ने स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंपकर इस अलग गुट को मान्यता न देने की कड़ी मांग की है।
बागी नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने स्पष्ट किया है कि असली TMC कौन है, इसका फैसला अब अदालत करेगी। बागी गुट पार्टी के चुनाव चिन्ह ‘जुड़वा फूल’ पर भी दावा पेश करेगा।
बागी सांसदों ने नई पार्टी में विलय क्यों किया?
दल-बदल विरोधी कानून (Anti-defection law) से बचने के लिए यह कदम उठाया गया है। नियम के अनुसार, जब किसी पार्टी के 2/3 सदस्य एक साथ अलग होते हैं, तो उन पर यह कानून लागू नहीं होता। बताया जा रहा है कि त्रणमूल कांग्रेस के 28 में से 20 सांसद अलग हो चुके हैं। इन्होंने NDA को समर्थन दिया है, जिससे इन्हें सत्तापक्ष के पास बैठने की जगह मिल सकती है। जुलाई में यह गुट आधिकारिक रूप से ‘तृणमूल’ नाम और चुनाव चिह्न पर दावा करेगा। वही ममता गुट अपनी पार्टी पर दावा बरकरार रखेगा। राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर बागी गुट की मान्यता रद्द करने की मांग की है। मामला अदालत और चुनाव आयोग तक जाना तय है।
