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मांगों को लेकर गरजे एससी—एसटी कर्मचारी, हितों की अनदेखी पर दी धर्म परिवर्तन की चेतावनी, पीएम व सीएम को भेजा ज्ञापन

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अल्मोड़ा। प्रमोशन में आरक्षण समेत कई अन्य मांगों को लेकर अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों ने जोरदार नारेबाजी के बीच प्रदर्शन किया और रैली निकाली। अंत में सात सूत्रीय मांगों को लेकर जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा।

उत्तराखंड एससी—एसटी इम्प्लाइज फेडरेशन के बैनर तले कर्मचारी चौघानपाटा में अंबेडकर की प्रतिमा के पास एकत्रित हुए। जहां एससी—एसटी वर्ग से जुड़े कर्मचारी व अन्य लोगों ने सभा ​की। इस दौरान हुई सभा में फेडरेशन नेताओं ने सरकार को आगाह किया कि यदि उसने संविधान प्रदत्त आरक्षण के प्रावधानों के खिलाफ कोई फैसला किया तो इसका मुंह तोड़ जवाब दिया जाएगा। कहा, सरकार द्वारा कर्मचारियों के हितों की अनदेखी की गई तो उन्हें सामूहिक रूप से धर्म परिवर्तन करने को विवश होना पड़ेगा।

सभा के समापन के बाद चौघानपाटा से माल रोड में शिखर तिराहा, मुख्य बाजार होते हुए कलक्ट्रेट परिसर तक रैली निकाली। ​रैली में कर्मचारियों ने मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी की। कलक्ट्रेट में डीएम की अनुपस्थिति में एसडीएम सीमा विश्वकर्मा के माध्यम से प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। इस अवसर पर फेडरेशन के जिलाध्यक्ष एमएस माथुर, वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष वृजपाल सिंह, जिला उपाध्यक्ष नीलिमा कोहली, प्रमोद कुमार, गौरव जसवाल समेत कई कर्मचारी व अन्य लोग मौजूद थे।

ये है फेडरेशन की मांगें—
उच्च न्यायालय के 15 नवंबर के आदेश के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एसएलपी वापस ली जाए व इंदु कुमार कमेटी व जस्टिस इरशाद हुसैन आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक कर उसका परीक्षण हो। रिपोर्ट के अनुसार एससी एसटी का सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व पूर्ण न होने की स्थिति में तत्काल कानून बनाकर प्रमोशन में आरक्षण बहाल हो
सीधी भर्ती में रोस्टर की समीक्षा को गठित कौशिक समिति की जब तक रिपोर्ट नहीं आती, तब तक वर्ष 2001 के रोस्टर के आधार पर सीधी भर्ती हो
राज्य स्थापना जनजाति के रोस्टर को शून्य मानकर उक्त तिथि से ही पदोन्नति व सीधी भर्ती में जनजाति का रोस्टर प्रारंभ किया जाए
अन्य पिछड़ा वर्ग को राजकीय सेवाओं में निर्धारित 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत आरक्षण किया जाए व पदोन्नति में भी आरक्षण दिया जाए
राज्य में विभिन्न विभागों में बैकलॉग के रिक्त पदों को विशेष भर्ती अभियान के तहत तत्काल भरा जाए
सरकारी संस्थानों में संविदा/आउटसोर्स के माध्यम से की जा रही नियुक्तियों में भी आरक्षण का शत प्रतिशत अनुपालन हो
उच्चतम न्यायालय के अंतिम फैसले के अधीन (सशर्त) डीपीसी पर रोक हटाने पर विचार होता है तो ये रोस्टर के आधार पर हो

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