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RT-PCR टेस्ट रिपोर्ट में CT वैल्यू, आइये जानते है इसका इन्फेक्शन से क्या है सम्बन्ध

29 अप्रैल 2021 कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच केंद्र वैक्सीनेशन और टेस्टिंग (RT-PCR) दोनों पर जोर दे रही है टीकाकरण अभियान के तहत अब…

29 अप्रैल 2021

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कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच केंद्र वैक्सीनेशन और टेस्टिंग (RT-PCR) दोनों पर जोर दे रही है टीकाकरण अभियान के तहत अब तक कुल 14.77 करोड़ से ज्यादा लोगों को वैक्सीन भी की डोज दी जा चुकी है।

बीते 24 घंटों में देशभर में कुल 24 लाख से अधिक नागरिकों को वैक्सीन लगाई गई है। कोरोना वायरस संक्रमण की जांच के लिये इस समय देशभर में कई तरह के टेस्ट जैसे रैपिड एंटीजन टेस्ट, RT-PCR टेस्ट इत्यादि हो रहे हैं। रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन RT-PCR टेस्ट’ RT-PCR ‘ को अन्य टेस्टों के मुकाबले ज्यादा सटीक माना गया है।

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क्या होता है RT-PCR टेस्ट ?

RT-PCR टेस्ट में किसी भी वायरस के जेनेटिक मटेरियल का टेस्ट किया जाता है। कोरोना वायरस एक RNA (Ribonucleic acid) वायरस है। यह केवल RNA प्रोटीन से बना है। इसलिए कोरोना वायरस के RNA को पहले DNA (Deoxyribonucleic acid) में बदला जाता है।
इस प्रक्रिया को रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन कहते है। जाता है। RNA को DNA में चेंज करने के बाद फिर इस DNA में चेन रिएक्शन करवाई जाती है। इस चेन रिएक्शन के जरिए किसी व्यक्ति के सैंपल में कोरोना वायरस की मौजूदगी का पता लगाया जाता है।

क्या होती है CT वैल्यू ?

RT-PCR टेस्ट में हमें CT वैल्यू का पता चलता है। CT वैल्यू से यह पता चलता है कि टेस्ट किये गये व्यक्ति में इन्फेक्शन का स्तर कितना है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि CT वैल्यू और वायरस एक दूसरे के व्युत्क्रमानुपाती होते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि जिस सैंपल की CT वैल्यू जितनी कम है, वायरल लोड उतना ही ज्यादा है। आईसीएमआर के दिशा निर्देशों के मुताबिक RT-PCR टेस्ट के तुरंत बाद लिए गए नमूने में संक्रमण का पता चलने पर वायरस की पॉजिटिविटी का पता लगाया जा सकता है।

कैसे पता लगाते है कि व्यक्ति कोरोना संक्रमित है या नहीं?

आईसीएमआर के मुताबिक सीटी वैल्यू के लिए वैश्विक रूप से दिया गया कट ऑफ रेंज 35-40 प्रतिशत है। किसी व्यक्ति की सीटी वैल्यू 35 या इससे कम है तो वो उसे कोविड मरीज के रूप में जाना जाएगा। लेकिन यदि यह यह आंकड़ा 35 से अधिक है तो इसका मतलब व्यक्ति कोविड संक्रमित नहीं है।

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