News-web

हरिद्वार में फंसे यात्रियों से मिलकर पुष्कर धामी ने दिया आश्वासन बोले, चार धाम के ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन खुलेंगे जल्द ही

Published on:

हरिद्वार में चार धाम यात्रा के यात्री बहुत बड़ी संख्या में फंसे हुए हैं। पुष्कर सिंह धामी ने उनसे सोमवार को मुलाकात की और उनकी सारी समस्याएं भी सुनी। सीएम धामी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वह जल्द ही ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू करने पर विचार करेंगे।

चार धाम यात्रा के ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन बंद होने के कारण तीर्थ यात्रियों को हरिद्वार और ऋषिकेश में ही रोक दिया गया, जिसके चलते हजारों यात्री ऋषिकेश हरिद्वार में फंसे हुए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सोमवार को चार धाम यात्रा की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए ऋषिकेश गए थे। वहां उन्होंने फंसे हुए यात्रियों से बात भी की और उनकी समस्याओं को भी सुना। उन्होंने यात्रियों से कहा कि कोई भी श्रद्धालु बिना दर्शन के वापस नहीं लौटाया जाएगा।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन को खोलने पर लगातार विचार कर रही है। वही मौसम के चलते चार धाम से लौटकर आ रहे तीर्थ यात्राओं की तबीयत भी काफी बिगड़ गई है। चार धाम से लौटे 60% यात्रियों में खांसी, जुकाम और बुखार के लक्षण देखने को मिल रहे हैं। बताया जा रहा है कि मैदानी राज्यों में तीर्थ यात्री पर्वतीय मौसम को खुद को ढाल नहीं पा रहे हैं।

चारधाम की यात्रा करके ऋषिकेश स्थित ट्रांजिट कैंप लौटे यात्रियों में से करीब 2150 यात्रियों ने जांच कराई है, जिनमें 1296 यात्री सर्दी से पीड़ित पाए गए हैं। ट्रांजिट कैंप के चिकित्सा केंद्र प्रभारी विजय गौड के अनुसार, ज्यादातर यात्री राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखंड, दिल्ली, कर्नाटक से हैं। ये लोग चारधाम यात्रा के तापमान में खुद ढाल नहीं पाते। यात्री चारधाम में ठंड की स्थिति को गंभीरता से नहीं लेते हैं। ठंड से बचाव के उपयुक्त साधन लेकर भी नहीं चलते। इस कारण अचानक बर्फीले तापमान के बीच रहकर यात्रियों को ठंड लग जाती है।

बताया जा रहा है कि उत्तराखंड में मौसम मैदान से लेकर पहाड़ तक काफी हैरान करने वाला है। मैदानी इलाकों में झुलसाने वाली गर्मी है। देहरादून का तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच गया है।

सालरा गांव में छह घर जलकर राख

भीषण गर्मी के चलते उत्तरकाशी जिले के मोरी ब्लॉक के दूरस्थ सालरा गांव में हुए अग्निकांड में छह आवासीय घर जलकर राख हो गए। हालात इतने बदत्तर हो गए कि राहत और बचाव कार्यों में मदद के लिए हेलिकॉप्टर भेजे जाने के लिए सेना से अनुरोध करना पड़ा।