पूर्णागिरि धाम में भंडारे पर अब नहीं देना होगा कोई शुल्क

Newsdesk Uttranews
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टनकपुर। टनकपुर के प्रसिद्ध पूर्णागिरि धाम में आयोजित होने वाले मेले में भंडारा करने वाले भक्तजनों के लिए अच्छी खबर है। खबर है कि मेले में भंडारा कराने के लिए जाने वाले 500 रूपये के शुल्क को जिला प्रशासन ने शून्य कर दिया है। अब भक्तों को भंडारा कराने का कोई शुल्क नही देना होगा।


जिला पंचायत की ओर से हर साल टनकपुर के पास स्थित पूर्णागिरी मंदिर में पूर्णागिरी मेला आयोजित होता है। इस मेले में उत्तराखण्ड और यूपी के कई जिलो से भक्त दर्शन के लिए पहुंचते है। यूपी के सीतापुर,लखनऊ,मेरठ,शाहजहांपुर,खीरी,हरदोई, बदायूं,बरेली,तिलहर आदि जगहों से भक्त् मंदिर दर्शन के लिए आते है।

एक अनुमान के अनुसार 200 से ज्यादा भंडारे अलग अलग दिनों में आयोजित होते थे। पहले भंडारा कराने के लिए 500 रूपया शुल्क देना होता था अब वह शुल्क खत्म कर दिया गया है।


पंडित मोहन पांडेय ने अन्नदान की महत्ता के बारे में बताते हुए कहा कि पुराणों में भी अन्नदान के रूप में भंडारे का जिक्र आता है। कहा कि पहले सामर्थ्यवान लोग अपनी हैसियत के अनुसार गरीबों को भोजन और वस्त्र आदि बांटते थे। बाद में भोजन और वस्त्र बांटने की प्रथा भंडारे में रूप में प्रचलित हो गयी। उन्होने पूर्णागिरी धाम में भंडारे का शुल्क खत्म किये जाने का स्वागत करते हुए कहा कि यह अच्छा कदम है और भंडारे जैसे नेक काम के लिए शुल्क लिया जाना धार्मिक दृष्टि से भी ठीक नही था।

अन्नदान की महत्ता के बारे में बताते हुए पंडित मोहन पांडेय ने कहा कि भंडारे का उल्लेख पुराणों में है। पहले सामर्थ्यवान लोग गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन और वस्त्र बांटा करते थे जो धीरे-धीरे भंडारे के रूप में परिवर्तित हो गई। पूर्णागिरि धाम में श्रद्धालु बड़ी संख्या में भंडारा करते हैं। इस पुण्य काम के लिए किसी तरह का शुल्क लिया जाना धार्मिक दृष्टि से भी ठीक नही था और अब प्रशासन ने इस पर रोक लगाकर अच्छा काम किया है।