उत्तराखण्ड के इस जिले में कलेक्ट्रेट और जनसुनवाई में मोबाइल ले जाने पर लगी रोक, वीडियो बनाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

उत्तराखण्ड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में अब कलेक्ट्रेट परिसर, विभागीय बैठकों और जनता दरबार (जनसुनवाई) के दौरान अधिकारियों से मिलने आने वाले फरियादियों और आम…

uttra news logo

उत्तराखण्ड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में अब कलेक्ट्रेट परिसर, विभागीय बैठकों और जनता दरबार (जनसुनवाई) के दौरान अधिकारियों से मिलने आने वाले फरियादियों और आम व्यक्तियों द्वारा मोबाइल से किसी भी प्रकार की अनधिकृत वीडियो रिकॉर्डिंग या रील-शूटिंग करने रोक लगा दी गई है।

25

पिथौराग प्रशासन इस फैसले के पीछे जनपद में प्रशासनिक कार्यों की गोपनीयता, अनुशासन और शासकीय मर्यादा को बनाए रखने को इसकी वजह बता रहा है। पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी ने इस संबंध में कड़े दिशा-निर्देश जारी करते हुए प्रवेश द्वार पर ही सभी के मोबाइल फोन बाहर जमा कराने के आदेश दिए हैं।


यहाँ जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगांई ने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) सदर जितेंद्र वर्मा को इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से कड़ाई से धरातल पर लागू करने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि अक्सर यह देखा जा रहा है कि कतिपय लोग बिना अनुमति के संवेदनशील प्रशासनिक कार्यवाहियों और बैठकों की वीडियो रिकॉर्डिंग कर लेते हैं, और बाद में उसे सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल माध्यमों पर भ्रामक तरीके से प्रसारित कर देते हैं। इससे न केवल शासकीय कार्यों की गंभीरता प्रभावित होती है, बल्कि गोपनीयता और प्रशासनिक गरिमा को भी ठेस पहुंचती है, जिसे अब किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


बिना मोबाइल एंट्री: प्रवेश से पहले बाहर जमा कराने होंगे फोन
नए नियमों के तहत कलेक्ट्रेट सभागार, जिलाधिकारी कार्यालय, जनसुनवाई कक्ष और किसी भी विभागीय बैठक में शामिल होने आने वाले आम नागरिकों और शिकायतकर्ताओं को अपने मोबाइल फोन कक्ष में प्रवेश करने से पहले ही बाहर निर्धारित काउंटर पर सुरक्षित रूप से जमा कराने होंगे। मोबाइल फोन बाहर जमा होने के बाद ही लोगों को अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखने की अनुमति मिलेगी, ताकि शिकायतों के निस्तारण की पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित, शांत और अनुशासित ढंग से संचालित हो सके।


नियम तोड़ने पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई, मीडिया को रहेगी छूट
जिलाधिकारी ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यह व्यवस्था केवल प्रशासनिक गरिमा और कार्यों की संवेदनशीलता को बनाए रखने के उद्देश्य से लागू की जा रही है। यदि कोई भी व्यक्ति इन सरकारी आदेशों का उल्लंघन करते हुए चोरी-छिपे या अनधिकृत रूप से वीडियो रिकॉर्डिंग या मोबाइल से शासकीय कार्यों की शूटिंग करते हुए पकड़ा गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। हालांकि, जिला प्रशासन ने साफ किया है कि सूचना विभाग के कार्मिकों और अधिकृत पत्रकारों (मीडिया) को उनके निर्धारित दायित्वों के तहत आवश्यक प्रेस कवरेज के लिए इस प्रतिबंधात्मक व्यवस्था से पूरी तरह छूट प्रदान की गई है।

Leave a Reply