अल्मोड़ा। उत्तराखंड सरकार में हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास परिषद के उपाध्यक्ष (दर्जा राज्य मंत्री) गोविंद सिंह पिलख्वाल ने आज हवालबाग विकासखंड के डीनापानी स्थित पंचाचूली हैंडलूम्स एवं हिमाद्री हैंडलूम एंड क्राफ्ट यूनिट का भ्रमण कर वहां संचालित गतिविधियों का अवलोकन किया।
इस दौरान उन्होंने महिला बुनकरों एवं हस्तशिल्प से जुड़ी महिलाओं से संवाद कर उनके कार्यों की सराहना की तथा उनकी समस्याओं और सुझावों को भी गंभीरता से सुना।
भ्रमण के दौरान श्री पिलख्वाल ने महिला स्वयं सहायता समूहों एवं बुनकरों द्वारा तैयार किए जा रहे हस्तकरघा उत्पादों, ऊनी वस्त्रों, पारंपरिक शिल्पकला एवं स्थानीय हस्तनिर्मित उत्पादों का निरीक्षण किया।
उन्होंने कहा कि कुमाऊँ की पारंपरिक कला और हस्तशिल्प केवल रोजगार का माध्यम ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। इन उत्पादों में पहाड़ की संस्कृति, लोक परंपराएं और स्थानीय कारीगरों की मेहनत स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग, डिज़ाइन विकास और विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
कार्यक्रम के दौरान महिला बुनकरों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि हस्तशिल्प एवं हथकरघा गतिविधियों से उन्हें आर्थिक मजबूती मिलने के साथ-साथ परिवार और समाज में सम्मान भी प्राप्त हो रहा है। इस अवसर पर प्रशिक्षण गतिविधियों का भी अवलोकन किया गया तथा हस्तशिल्प उत्पादों के संरक्षण, संवर्धन और बेहतर विपणन को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
गोविंद पिलख्वाल ने कहा कि उत्तराखंड की पारंपरिक कला को नई पहचान दिलाने के लिए युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि बुनकरों और शिल्पकारों की समस्याओं के समाधान तथा उनके उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने हेतु हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य प्रदीप मेहता, पूर्व जिला पंचायत सदस्य महिपाल बिष्ट, जिला उद्योग केंद्र (डीआईसी) के सहायक प्रबंधक शंकर मेहता सहित अनेक गणमान्य लोग, महिला बुनकर एवं शिल्पकार उपस्थित रहे।
