जम्मू-कश्मीर के राजौरी क्षेत्र में एक सैन्य अभियान के दौरान शहीद हुए 5 असम रेजिमेंट के जांबाज अधिकारी लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी को रविवार को उनके गृह जनपद अल्मोड़ा में नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। वीर सपूत का पार्थिव शरीर सेना के हेलीकॉप्टर से अल्मोड़ा पहुंचाया गया, जहां हजारों की संख्या में उमड़े जनसैलाब ने भारत माता के जयकारों के बीच अपने लाडले को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए विश्वनाथ घाट ले जाया गया। विश्वनाथ घाट में पूरे सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ उनकी अंत्येष्टि हुई।
विश्वनाथ घाट पर सेना के जवानों ने शस्त्र झुकाकर और गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने साथी अधिकारी को अंतिम सलामी दी। सैन्य परंपराओं और रीति-रिवाजों के बीच जब वीर सपूत का अंतिम संस्कार हुआ, तो वहां मौजूद हर आंख छलक उठी। महज 25 साल की अल्पायु में देश की रक्षा के लिए प्राण न्यौछावर करने वाले बीरेश्वर का यह सर्वोच्च बलिदान क्षेत्र के लोगों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेगा।
अल्मोड़ा के जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी के निधन पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि देश की रक्षा के लिए दिया गया उनका यह सर्वोच्च बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा और यह उत्तराखंड की युवा पीढ़ी के लिए एक महान प्रेरणा बनेगा। जिलाधिकारी ने शहीद के माता-पिता और पूरे परिवार को ढांढस बंधाते हुए अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
इस भावुक कर देने वाले पल में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक चंद्रशेखर आर घोड़के, अपर जिलाधिकारी युक्ता मिश्र और सेना के उच्च अधिकारियों ने शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें नमन किया। अधिकारियों ने शोक में डूबे परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी।
