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उत्तराखण्ड में आफत की बारिश से कई सड़कें हुई बंद

Newsdesk Uttranews
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Rain wreaking havoc
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उत्तराखण्ड में मानसून के आने के साथ ही बारिश लगातार जारी है। यह बारिश आफत का सबब लेकर आई है,जहां प्रदेश भर में 11 राजकीय राजमार्ग और 115 सड़के बंद चल रही है। रविवार को कुल 119 मशीनें सड़क को खोलने के लिए लगाई गई थी। राजकीय राजमार्गों में 9, मुख्य जिला मार्गों में 12, अन्य जिला मार्गों में 5, ग्रामीण सड़कों में 51 और पीएमजीएसवाई की सड़कों को खोलने के लिए 47 मशीनों काम पर लगाई गई। जानकारी के अनुसार अब तक की बारिश में सड़कों को खोलने के लिए ही 1259.48 लाख रुपये खर्च किए गए। अनुमान है कि पूर्ववत स्थिति में लाने के लिए 1374.68 लाख रुपये खर्च होंगे। इस बार के मानसून के सीजन में अभी तक 883 सड़कें बंद हुईं हैं, इनमें से 757 सड़कों को खोल दिया गया।

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लगातार बारिश के कारण चारधाम यात्रा भी प्रभावित हुई है। अब मौसम विज्ञान विभाग ने 6 जुलाई तक बारिश को लेकर येलो अलर्ट भी जारी कर दिया है। मौसम विभाग के अलर्ट के चलते राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिलों के आला अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने को कहा है।

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मौसम विज्ञान विभाग की ओर से अगले दो दिन बारिश को लेकर चेतावनी जारी की गई है। इसके साथ ही मौसम विभाग ने बताया है कि कुमांऊ क्षेत्र में गढ़वाल क्षेत्र की अपेक्षाकृत ज्यादा बारिश होने की संभावना है। बारिश को लेकर मौसम विभाग ने येलो अलर्ट भी जारी किया है।


मौसम विज्ञान केंद्र आईएमडी ने आगामी दो दिन यानि छह जुलाई तक समूचे उत्तराखण्ड में बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी कर दिया है।मौसम विभाग के अनुसार प्रदेशभर में बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है। चेतावनी के अनुसार कुमांऊ क्षेत्र में गढ़वाल क्षेत्र की अपेक्षाकृत ज्यादा बारिश होने की संभावना है। बजाय कुमाऊं क्षेत्र में अधिक बारिश की संभावना है। जारी चेतावनी के अनुसार कुमाऊं के कई इलाकों में आज भी किसी किसी क्षेत्र में भारी बारिश हो सकती है। वही अन्य इलाको में बिजली चमकने और हल्की बारिश की संभावना जताई गई है

देहरादून स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह ने कहा कि 6 जुलाई तक प्रदेशभर में बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। बताया कि कुमांऊ क्षेत्र में गढ़वाल क्षेत्र की अपेक्षाकृत ज्यादा बारिश होने की संभावना है। संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन और चट्टान गिरने से सड़क और राजमार्ग में यातायात में बाधा आ सकती है तो वही बारिश के कारण नदियों और नालों में जलस्तर बढ़ने की संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक विक्रम सिंह ने लोगों से मौसम की जानकारी लेने के बाद ही यात्रा करने की सलाह दी है वही नदियों और नालों के आसपास जाने से बचने की सलाह दी है।