लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने और उसे तकनीक से जोड़ने के लिए महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के एक प्राइमरी शिक्षक को 7 करोड रुपए का पुरस्कार मिला। यह शिक्षक हैं रंजीत सिंह दिसाले इन्होंने ग्लोबल टीचर पुरस्कार जीता है। लेकिन इन्होंने बड़ा दिल दिखाते हुए अपनी कुल जीती हुई राशि की आधी रकम दान कर दी है।

कोरोना महामारी के कारण जहां एक ओर स्कूल पूरी तरह से बंद है वही रंजीत सिंह दिसाले ने लड़कियों को पढ़ाने के लिए घर-घर जाकर अभिभावकों को समझाया, इसके अलावा अंग्रेजी में उपलब्ध सभी किताबों का मातृभाषा में अनुवाद किया और उसे तकनीक से जोड़ दिया, यह तकनीक थी क्यूआर कोड देना ताकि छात्र वीडियो लेक्चर अटेंड कर सकें, अपनी ही भाषा में कहानी कविताएं सुन सके, इसके बाद क्षेत्र में बाल विवाह की दर में तेजी से गिरावट आने लगी।

बता दें कि महाराष्ट्र में क्यूआर कोड से किताबों को जोड़ने की पहल सोलापुर के इसी शिक्षक की थी, बाद में वर्ष 2017 में महाराष्ट्र सरकार को यह प्रस्ताव दिया कि सारी पुस्तकें इससे जोड़ दी जाए, अब एनसीईआरटी ने भी इस तकनीक को अपनाने का ऐलान कर दिया है।