वाशिंगटन। अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (DNI) तुलसी गैबार्ड ने एक बेहद संवेदनशील और वैश्विक स्तर पर हड़कंप मचाने वाली गोपनीय खुफिया जानकारी को सार्वजनिक (डिक्लासिफाइड) कर दिया है। गैबार्ड द्वारा जारी इन दस्तावेजों से नए सबूत मिले हैं कि अमेरिकी सरकार लंबे समय से यूक्रेन सहित दुनिया के 30 से अधिक देशों में 120 से ज्यादा जैविक प्रयोगशालाओं (बायो-लैब्स) को वित्तीय सहायता (फंडिंग) दे रही थी।
यह सनसनीखेज खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का प्रशासन खतरनाक ‘गेन-ऑफ-फंक्शन’ (Gain-of-Function) अनुसंधान के लिए संघीय बजटीय सहायता को पूरी तरह समाप्त करने और विदेशी जैविक कार्यक्रमों की निगरानी को कड़ा करने के प्रयासों में जुटा है।
एक्स (X) पर दस्तावेजों को जारी कर फौसी पर साधा निशाना
राष्ट्रीय खुफिया निदेशक कार्यालय (ODNI) की प्रमुख तुलसी गैबार्ड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इन खुफिया दस्तावेजों को जारी करते हुए इसे “पहले कभी न देखी गई खुफिया जानकारी” बताया। उन्होंने सीधे तौर पर अमेरिका के पूर्व संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. एंथोनी फौसी, पूर्ववर्ती बाइडेन प्रशासन की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम और स्वास्थ्य अधिकारियों पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया।
गैबार्ड ने अपने बयान में कहा कि “अब तक इन प्रयोगशालाओं के अस्तित्व और इनकी भारी-भरकम फंडिंग से जुड़े साक्ष्यों को जानबूझकर अमेरिकी जनता से छिपाया गया था। राजनेताओं और डॉ. फौसी जैसे तथाकथित स्वास्थ्य पेशेवरों ने इस विनाशकारी वैश्विक खतरे को लेकर झूठ बोला और उन लोगों पर हमले किए जिन्होंने इस पर सवाल उठाए थे।”
यूक्रेन की प्रयोगशालाओं पर बढ़ा खतरा
ओडीएनआई द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका समर्थित कई लैब्स यूक्रेन में भी सक्रिय थीं। रूस के साथ चल रहे सैन्य संघर्ष के कारण इन जैविक सुविधाओं की सुरक्षा को लेकर खुफिया एजेंसियों ने बड़ी चेतावनी जारी की है। खुफिया समुदाय का मानना है कि यूक्रेन में अमेरिका द्वारा वित्त पोषित प्रयोगशालाओं में खतरनाक रोगाणु (Pathogens) मौजूद हो सकते हैं, जो रूसी हमलों, आकस्मिक क्षति या किसी जब्ती के कारण वैश्विक संकट बन सकते हैं। हालांकि, सुरक्षा कारणों से इन प्रयोगशालाओं के सटीक पते और इनमें मौजूद वायरसों के नामों को अभी उजागर नहीं किया गया है।
क्या है ‘गेन-ऑफ-फंक्शन’ रिसर्च और क्यों है इस पर विवाद?
खुफिया विभाग के अनुसार, कुछ चुनिंदा प्रयोगशालाओं में खतरनाक और अत्यधिक संक्रामक रोगाणुओं पर रिसर्च की जा रही थी। इसमें ‘गेन-ऑफ-फंक्शन’ शोध भी शामिल है।
क्या होती है यह तकनीक? गेन-ऑफ-फंक्शन एक ऐसी वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसमें किसी वायरस या रोगाणु के जेनेटिक स्ट्रक्चर को कृत्रिम रूप से बदला (म्यूटेट) जाता है ताकि उसकी मारक क्षमता, फैलने की गति या संक्रामकता को बढ़ाया जा सके। वैज्ञानिक इसका तर्क यह देते हैं कि इससे भविष्य की महामारियों को पहले से समझने में मदद मिलती है, लेकिन आलोचकों का मानना है कि प्रयोगशाला से एक भी लीक पूरी दुनिया को कोविड-19 से भी बड़े विनाश में धकेल सकती है।
राष्ट्रपति ट्रम्प का सख्त आदेश
तुलसी गैबार्ड ने कहा कि यह खुलासा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा 25 मई 2025 को हस्ताक्षरित कार्यकारी आदेश 14292 (Executive Order 14292) के बाद किया गया है। इस आदेश का मुख्य उद्देश्य विदेशों में अमेरिकी करदाताओं के पैसों से होने वाले ऐसे किसी भी खतरनाक गेन-ऑफ-फंक्शन अनुसंधान पर पूरी तरह से रोक लगाना है।ओडीएनआई ने अब अमेरिकी खुफिया समुदाय को विदेशी जैविक प्रयोगशालाओं पर खुफिया जानकारी जुटाने का दायरा बढ़ाने का निर्देश दिया है, जिससे इन लैब्स में चल रहे नैदानिक परीक्षणों और नैतिक-वित्तीय गड़बड़ियों का पर्दाफाश किया जा सके।
