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धार्मिक यात्राओं का बढ़ता दबाव, उत्तराखंड में नियामक एजेंसी की मांग तेज

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उत्तराखंड में धार्मिक यात्राओं के प्रबंधन और संचालन को लेकर राज्य सरकार पर एक अलग नियामक एजेंसी बनाने का दबाव बढ़ता जा रहा है। चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचने के बाद यह मुद्दा और भी गंभीर हो गया है।

गौरतलब हो, चारधाम यात्रा में अनुमान से दोगुने श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। श्रद्धालुओं के उमड़ने से सरकारी इंतजाम थोड़े पड़ गए हैं, जिस कारण ऑफ़लाइन रजिस्ट्रेशन बंद करने पड़े हैं। अब तक 31 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है और 8 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। जून माह में स्कूलों के अवकाश के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में और बढ़ोतरी होने की संभावना है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यात्रा प्रबंधन प्राधिकरण बनाने की जिम्मेदारी अधिकारियों को सौंपी है।

पिछले साल कांवड़ यात्रा में भी रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए थे, जिसके लिए सरकार को पैरामिलिट्री फोर्स की मदद लेनी पड़ी थी।हेमकुंड यात्रा भी सरकार के लिए एक चुनौती है। कांवड़ यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या आने वाले वर्षों में और बढ़ने की संभावना है।

बता दें, धार्मिक यात्राओं में बढ़ती संख्या और चुनौतियों को देखते हुए एक नियामक एजेंसी की आवश्यकता महसूस की जा रही है। यह एजेंसी यात्राओं के प्रबंधन, सुरक्षा, सुविधाओं और समन्वय के लिए जिम्मेदार होगी। मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन को धार्मिक यात्राओं की कार्ययोजना बनाने का जिम्मा सौंपा है।

19 दिन की कैलाश मानसरोवर यात्रा भी एक चुनौतीपूर्ण यात्रा है। 2026 में होने वाली नंदादेवी राजजात यात्रा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। धार्मिक यात्राएं उत्तराखंड के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनका प्रबंधन एक कठिन कार्य है। नियामक एजेंसी का गठन इन यात्राओं के प्रबंधन में सुधार लाने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने में मददगार साबित हो सकता है।