उत्तराखंड के राज्य कार्मिकों की मांगों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं होगी: बिट्टू कर्नाटक

उत्तरा न्यूज टीम
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अल्मोड़ा। पूर्व दर्जा मंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष बिट्टू कर्नाटक ने जारी एक बयान में कहा कि उत्तराखंड सरकार व विभागों द्वारा वर्तमान में कार्मिकों की मांगों को पूरा करने के बजाय कुचलने का कार्य किया जा रहा है, जिससे राज्य कार्मिकों में सरकार के खिलाफ असंतोष व्याप्त है,उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा एक एक करके पूर्व की सरकारों द्वारा दी गई सुविधाएं को छीनने का प्रयास किया जा रहा है।

स्थानांतरण एक्ट के तहत सरकार द्वारा केवल दस फीसदी स्थानांतरण किये गये और तीन साल से एक स्थान पर कार्यरत सदस्यों के जबरन स्थानांतरण के लिए सूचनाएं मांगी जा रही है। एक तरफ पारदर्शिता की बात की जाती है वहीं दूसरी तरफ कार्मिकों की भावनाओं से खिलवाड़ किया जा रहा है। वर्तमान उत्तराखंड शासन में मनमानी चरम पर पहुंच गई है, कर्मचारियों से कोई संवाद कायम नहीं किया जा रहा है। जहां राज्य में पुरानी पेंशन बहाली प्रमुख मुद्दा है लेकिन उस संबंध में उत्तराखंड सरकार द्वारा कोई सार्थक प्रयास नहीं किया जा रहा है।

कहा कि सरकार को कार्मिकों को पेंशन का लाभ देने में परेशानी है। पुरानी पेंशन बहाली से जहां कार्मिकों का भविष्य सुरक्षित होता वही यह पैसा बाजार व्यवस्था को भी बनाए रखता है और पूंजी का चक्र चलता रहता है और विकास में भी मदद मिलती है लेकिन राज्य सरकार द्वारा इसे अनदेखा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी कार्मिकों,शिक्षकों द्वारा इस संबंध में दिल्ली रामलीला मैदान जंतर मंतर व देहरादून व जिला मुख्यालय में भी रैली आयोजित की गई लेकिन सरकार के कान में जूं तक नही रेंगती। सरकार द्वारा शिथिलीकरण की व्यवस्था को भी विस्तारित नहीं किया जा रहा है इसके तहत पूरे सेवा काल में पदोन्नति के पद पर अर्ह सेवा में पचास प्रतिशत छूट का प्रावधान किया गया है।

इस व्यवस्था को तीस जून 2022 के बाद विस्तारित किये जाने की आवश्यकता है। इस शासनादेश के जारी नहीं होने से पदोन्नति के पद रिक्त हो रहे हैं। एक्ट में सुगम व दुर्गम नीति से सुगम में पदोन्नति के पद रिक्त हो रहे हैं जिससे कनिष्ठ सहायक,वरिष्ठ सहायक आदि सैकड़ों पद कई विभागों में मैदानी जनपदों में रिक्त रह जा रहे हैं और सरकारी कार्य में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।मृतक आश्रितों को भी पहली नियुक्ति दुर्गम में दी जा रही है जबकि घर के निकटवर्ती स्थानों में नियुक्ति मिलने पर सरकारी सेवा के साथ साथ घर की देखभाल भी हो जाती।ए सी पी 10-16-26 के स्थान पर 10-20-30 लागू कर दी गई है इससे भी उन सदस्यों को आर्थिक नुकसान हो रहा है जहां पदोन्नति के पद उपलब्ध नहीं है।अनुरोध व अनिवार्य स्थानांतरण में भी पहला दूसरा विकल्प न देकर सातवां आठवां विकल्प दिया जा रहा है जिससे कार्मिकों में असंतोष व्याप्त है।

कर्नाटक ने कहा कि अनिवार्य व अनुरोध के स्थानांतरण में भी काउंसलिंग की नीति अपनाने की
आवश्यकता है ताकि अधिकारी मनमानी न कर सके।गोल्डन कार्ड की विसंगतियों दूर नहीं हो रही है जबकि सरकार द्वारा हर माह कर्मचारियों के वेतन से 1000,650,450,250 की मासिक कटौती विभिन्न वेतनमानों के स्तर पर की जा रही है।कई वेतनमानों में विसंगतियों का निराकरण नहीं हो रहा है।मान्यता प्राप्त संगठन के अध्यक्ष व सचिव को भी जनपद में स्थान नहीं देकर जनपद से बाहर पदोन्नति दी गई है ऐसे में सरकार व विभाग की ओर से संगठन का अस्तित्व ही खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है।

श्री कर्नाटक ने कहा कि दिसम्बर का महीना खत्म होने की ओर से और अभी तक विभागों में पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू नहीं होने से भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।सेवा पुस्तिका व अन्य अभिलेख का डिजिटाइजेशन जिला मुख्यालय में नहीं कर देहरादून राजधानी में बुलाया जा रहा है इससे भी कर्मचारियों में रोष व्याप्त है।सरकार द्वारा एक एक करके उन सुविधाओं को छीना जा रहा है जो पूर्व में कर्मचारियों ने आंदोलन के द्वारा प्राप्त किये थे।

सरकारी कार्यालयों में चतुर्थ श्रेणी के पदों को समाप्त कर दिया गया है ऐसी स्थिति में नई भर्ती नहीं हो रही है और सेवाएं चरमरा गई है।कार्यालय खोलने व बंद करने के लिए भी कोई नहीं है और यह कार्य विभाग के अधिकारियों द्वारा ही किसी प्रकार किया जा रहा है जबकि उत्तर प्रदेश के समय सभी कार्यालयों में पर्याप्त संख्या में पद सृजित थे। उत्तराखंड में पद समाप्त कर दिए गए। विद्यालयों में भी प्रधानाध्यापक व प्रधानाचार्य के सैकड़ों पद रिक्त हैं ऐसे में सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि किस प्रकार वहां शिक्षण व्यवस्था चल रही होगी। उन्होंने कहा कि सरकार को सभी संगठनों के साथ वार्ता कर सभी लंबित मामलों में शासनादेश जारी करना चाहिए।वर्तमान स्थिति में कार्मिकों में असंतोष व्याप्त है।उत्तराखंड राज्य के लिए यह वर्तमान स्थिति ठीक नहीं है।

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