पति को खोने के बाद भी नफरत नहीं बोली हिमांशी, सोशल मीडिया पर घिरी तो महिला आयोग आया साथ

हिमांशी नरवाल ने बस इतना कहा कि देश में शांति बनी रहनी चाहिए। किसी भी समुदाय के खिलाफ नफरत न फैलाई जाए। लेकिन उनके इस…

हिमांशी नरवाल ने बस इतना कहा कि देश में शांति बनी रहनी चाहिए। किसी भी समुदाय के खिलाफ नफरत न फैलाई जाए। लेकिन उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें बुरी तरह ट्रोल किया जाने लगा। ये वही हिमांशी हैं जिनके पति लेफ्टिनेंट विनय नरवाल जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में शहीद हो गए थे।

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विनय नरवाल की शहादत के वक्त की तस्वीरें देशभर में वायरल हुई थीं। जिनमें हिमांशी अपने पति के पार्थिव शरीर के पास बैठी थीं। उस वक्त हर कोई भावुक हो गया था। विनय और हिमांशी की शादी 16 अप्रैल को मसूरी में हुई थी। इसके ठीक छह दिन बाद दोनों हनीमून पर पहलगाम पहुंचे थे। जहां 22 अप्रैल को आतंकी हमला हुआ। इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी। जिसमें लेफ्टिनेंट विनय भी शामिल थे। बताया गया कि आतंकियों ने उनकी धार्मिक पहचान पूछकर गोली मारी थी।

शहीद पति को खोने के बाद हिमांशी ने पहली बार 1 मई को करनाल में एक रक्तदान शिविर में मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि वह चाहती हैं देशवासी उनके पति की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें। साथ ही उन्होंने अपील की कि किसी मुसलमान या कश्मीरी के खिलाफ नफरत न फैलाई जाए। हमें शांति चाहिए। सिर्फ शांति।

हिमांशी की इस बात को कुछ लोगों ने गलत समझा। और फिर सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ ट्रोलिंग शुरू हो गई। कुछ लोगों ने उनकी निजी जिंदगी को भी निशाना बनाकर बातें कहीं। हालात ऐसे बने कि राष्ट्रीय महिला आयोग को इस मामले में दखल देना पड़ा।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने ट्रोलिंग की तीखी निंदा की। और कहा कि किसी महिला को उसके निजी विचार या जिंदगी के कारण निशाना बनाना पूरी तरह गलत है। आयोग ने साफ किया कि किसी से असहमति हो सकती है। लेकिन उसे जाहिर करने का तरीका संविधान और मर्यादा के दायरे में होना चाहिए। आयोग ने हिमांशी के बयान को उनके निजी अधिकार का हिस्सा बताया। और कहा कि ऐसा बर्ताव स्वीकार नहीं किया जा सकता।