जंगलों को वनाग्नि से बचाने को 1 अप्रैल को ओण दिवस मनाये जाने की मांग

Demand to celebrate On Day on 1st April to save forests from forest fire. अल्मोड़ा, 12 जनवरी 2024- ग्रामोद्योग विकास संस्थान ने ग्रीष्म काल में…

Demand to celebrate On Day on 1st April to save forests from forest fire.

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अल्मोड़ा, 12 जनवरी 2024- ग्रामोद्योग विकास संस्थान ने ग्रीष्म काल में घटित होने वाली वनाग्नि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए 1 अप्रैल को ओण दिवस आयोजित करने की मांग की है।


संस्था ने ऐसा पत्र अल्मोड़ा, बागेश्वर, चम्पावत, नैनीताल, पिथौरागढ़, टिहरी, उत्तरकाशी, पौड़ी, देहरादून, रुद्रप्रयाग, चमोली के जिलाधिकारियों को भेज़ कर ओण जलाने की कार्रवाई को सुरक्षित, व्यवस्थित और समयबद्ध करने का अनुरोध किया गया है साथ ही आग लगने पर पहले एक घंटे में आग बुझाने के प्रयासों को आरम्भ करने हेतु प्रत्येक गाँव में वनाग्नि समिति का गठन करने की भी मांग करते हुए मुख्यमंत्री की शीतलाखेत मॉडल को लागु करने की घोषणा की ओर ध्यानाकर्षण किया है।


संस्था ने कहा कि वनाग्नि से जल स्रोतों, जैव विविधता और पारिन्थिकी तंत्र को अपूरणीय हानि हो रही है, आग लग जाने के बाद वनाग्नि को नियंत्रित कर पाना बेहद मुश्किल और श्रमसाध्य काम होता हैं ऐसे में वनाग्नि के कारणों की पहचान कर जनसहभागिता में वनाग्रि को आरम्भ होने से रोकने और वनाग्नि आरम्भ होने के पहले एक घंटे में उसे नियंत्रित करने के उपाय करने से वनाग्नि दुर्घटनाओं में 90% कमी लायी जा सकती है

पत्र में कहा गया है कि जनपद अल्मोड़ा में कोसी नदी के मुख्य रिचार्ज जोन स्याही देवी शीतलाखेत क्षेत्र में जनसहभागिता से वर्ष 2003-4 से जंगल बचाओ जीवन बचाओ अभियान चलाया जा रहा है इसी अभियान में निकले 4 मॉडल्स में से मे वनाग्रि नियंत्रण हेतु निकले मॉडन “ओण दिवस “को उत्तराखंड सरकार द्वारा “शीतलाखेत मॉडल ” की संज्ञा देते हुए इसे उत्तराखंड राज्य के सभी जिलों में लागू किये जाने की घोषणा की हैं।

उत्तराखंड के पर्वतीय भूभाग में खरीफ की फसलों के लिए खेत तैयार करते समय महिलाओं द्वारा खेत और घरों आस पास उग आयी झाड़ियों को काटकर सुखा कर जलाया जाता है जिसे ओण / आड़ा / केड़ा जलाना कहा जाता है। ओण जलाने में होने वाली लापरवाही जंगलों में आग लगने का सबसे मुख्य कारण है. यदि ओण जलाने की कार्यवाही को समयबद्ध और व्यवस्थित कर 31 मार्च से पूर्व पूरा कर लिया जाए तो वनाग्नि की घटनाओं में 90% की कमी लायी जा सकती है।

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ओण जलाने की कार्यवाही को समयबद्ध और व्यवस्थित करने में वन बीट अधिकारी (वन विभाग), राजस्व उप निरीक्षक (राजस्व विभाग), ग्राम पंचायत, ग्राम विकास अधिकारी (पंचायती राज विभाग) के साथ ग्राम प्रहरी ( राजस्व एवं पुलिस विभाग ) के मार्गदर्शन एवं सहयोग से ग्राम प्रधान, सरपंच और महिला मंगल दल, महिला समूहों को जोड़कर 31 मार्च से पूर्व ओण जलाने की कार्रवाई पूरी करने और गाँव के नजदीक वनों में आग आरम्भ होने पर पहले एक घंटे में उसे बुझाने का प्रयास आरम्भ करने हेतु प्रत्येक ग्राम सभा में ग्राम वनाग्नि प्रबंधन समिती का गठन करना वनाग्नि की चुनौती का सामना श्रेयस्कर होगा।


पत्र में वनाग्नि पर प्रभावी नियंत्रण हेतु । अप्रैल को ओण दिवस के आयोजन तथा प्रत्येक गाँव में ग्राम वनाग्नि प्रबंधन समिती गठित किये जाने हेतु आवश्यक दिशा निर्देश जारी करने की मांग भी की है। सलाहकार गजेन्द्र पाठक की ओर से पत्र भेजा गया है।