ब्रेकिंग – सीजफायर पर मंडराया बड़ा खतरा इजरायली हमलों से ईरान खफा , समझौते से पीछे हटने की दी चेतावनी

अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक सीजफायर पर कुछ ही घंटों में एक बहुत बड़ा खतरा मंडराने लगा है। ईरान ने स्पष्ट और कड़ी…

Just before the two-week ceasefire deadline between America and Iran, Trump reversed

अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक सीजफायर पर कुछ ही घंटों में एक बहुत बड़ा खतरा मंडराने लगा है। ईरान ने स्पष्ट और कड़ी चेतावनी दी है कि अगर लेबनान पर हमले जारी रहे तो वो भी जबाबी पलटवार करेगा।

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अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की घोषणा ने पूरी दुनिया को कुछ पल के लिए राहत जरूर दी थी लेकिन यह शांति चंद घंटों में ही धुएं में उड़ गई। ईरान की तेल रिफाइनरी पर हुए बड़े हमले और उसके बाद कुवैत कतर तथा बहरीन तक फैले ईरानी पलटवार ने इस सीजफायर को पूरी तरह से तार तार कर दिया है। अब पूरी दुनिया के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि सीजफायर टूटने के बाद अब आगे क्या होगा और मध्य पूर्व का भविष्य किस दिशा में जा रहा है।


पाकिस्तान की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
इस सीजफायर को कराने में पाकिस्तान ने एक अहम मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद पाकिस्तानी नेतृत्व का इसके लिए शुक्रिया अदा किया था। लेकिन सीजफायर के कुछ ही घंटों बाद फेल हो जाने से पाकिस्तान की कूटनीतिक साख को गहरा धक्का लगा है। अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान की मध्यस्थता केवल कागजी थी या फिर इस पूरी शांति प्रक्रिया के पर्दे के पीछे कोई और ही कूटनीतिक खेल चल रहा था।


क्या फिर से शुरू होगा विनाशकारी महायुद्ध
रक्षा और विदेश मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि सीजफायर का इतनी जल्दी टूटना एक बहुत बड़े खतरे का स्पष्ट संकेत है। अब अमेरिका और ईरान के बीच विश्वास की कमी अपने चरम पर पहुंच गई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि अमेरिका अब ईरान पर पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक और बड़े हमले कर सकता है क्योंकि ट्रंप प्रशासन इस हमले को अपने साथ हुए कूटनीतिक धोखे के रूप में देख रहा है। वहीं ईरान भी यह मानकर चल रहा है कि किसी भी शांति समझौते पर भरोसा नहीं किया जा सकता इसलिए वह भी पूरे खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी और सहयोगी ठिकानों को निशाना बनाना तेज करेगा।


होर्मुज जलडमरूमध्य पर मंडराता खतरा
सीजफायर की मुख्य शर्त होर्मुज स्ट्रेट को व्यापारिक जहाजों के लिए पूरी तरह खोलना था। लेकिन इन ताजा हमलों के बाद ईरान इस जलमार्ग को पूरी तरह से ब्लॉक करने का सख्त कदम उठा सकता है। अगर ईरान ने यह कदम उठाया तो दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हो जाएगी और पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था एक भयंकर ऊर्जा संकट और मंदी की चपेट में आ जाएगी।


वर्तमान हालात को देखते हुए यह स्पष्ट है कि शांति और कूटनीतिक बातचीत के रास्ते अब लगभग बंद हो चुके हैं। जब तक कोई बड़ी अंतरराष्ट्रीय संस्था या शक्ति सीधे तौर पर हस्तक्षेप नहीं करती तब तक इस महायुद्ध के रुकने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। दुनिया को अब एक लंबे और विनाशकारी क्षेत्रीय संघर्ष के लिए तैयार रहना होगा जिसका सीधा और नकारात्मक असर हर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है।