देहरादून। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी शिफ्ट करने का रास्ता पूरी तरह साफ कर दिया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के वर्ष 2024 के उस आदेश को सिरे से रद्द कर दिया है, जिसमें हाईकोर्ट को हल्द्वानी शिफ्ट करने के लिए राज्य सरकार द्वारा दिए गए वैकल्पिक भूमि के प्रस्ताव को ठुकरा दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह के संवेदनशील और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े मामलों का फैसला प्रशासनिक स्तर पर बातचीत के जरिए तय किया जाना चाहिए, न कि न्यायिक कार्यवाहियों के माध्यम से।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस मामले में अहम आदेश सुनाते हुए कहा कि हल्द्वानी में हाईकोर्ट के नए परिसर के लिए आवंटित की गई भूमि का कब्जा ‘जैसी है, जहां है’ के आधार पर आगामी छह सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट प्रशासन को सौंप दिया जाए। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को भूमि हस्तांतरण के संबंध में आठ सप्ताह के भीतर अधिसूचना जारी करने के कड़े निर्देश भी दिए हैं।
हरियाली को नुकसान पहुंचाए बिना पेड़ों समेत मिलेगा कब्जा
सुनवाई के दौरान जब अदालत के संज्ञान में यह बात लाई गई कि चिन्हित भूमि पर वन क्षेत्र होने के कारण कुछ पेड़ हटाने की आवश्यकता पड़ सकती है, तो मुख्य न्यायाधीश ने पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि भूमि का कब्जा पेड़ों के साथ ही हस्तांतरित किया जा सकता है, लेकिन इलाके की हरियाली को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। सर्वोच्च अदालत ने मामले की पैरवी कर रहे सीनियर एडवोकेट ए.एस. रावत से स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट का न्यायिक पक्ष में इस तरह की प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर आदेश देने का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं बनता है।
बताते चले कि उत्तराखंड हाईकोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा एक अपील दायर की गई थी, जिसमें नैनीताल हाईकोर्ट के 8 मई 2024 के आदेश को चुनौती दी गई थी। तत्कालीन आदेश में हाईकोर्ट ने हल्द्वानी के गोलापार में प्रस्तावित 26 हेक्टेयर भूमि में से 75 प्रतिशत हिस्सा वन क्षेत्र होने और पेड़ों के कटान की बात कहकर राज्य सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।
तब हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को एक महीने में नई भूमि तलाशने और ऑनलाइन पोर्टल के जरिए जनता व वकीलों की राय लेने के लिए एक कमेटी बनाने का निर्देश दिया था, जिस पर बाद में सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी। अब इस नए फैसले के बाद हल्द्वानी में हाईकोर्ट के शिफ्ट किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।

