‘उत्तरा न्यूज़’ की विशेष स्वास्थ्य परिचर्चा में इस बार हमारे साथ जुड़े है अल्मोड़ा जिला अस्पताल के प्रसिद्ध त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. नमन लोहनी। इस चर्चा के दौरान डॉ. लोहनी ने चेहरे पर होने वाली झाइयों यानी मेलाज्मा की समस्या पर विस्तार से जानकारी दी और इससे जुड़े कई भ्रमों को दूर किया।
क्या होता है मेलाज्मा?
डॉ. नमन लोहनी के अनुसार, मेलाज्मा स्किन पिगमेंटेशन का एक प्रकार है। इसमें चेहरे पर गहरे भूरे या काले रंग के धब्बे दिखाई देने लगते हैं। आमतौर पर ये धब्बे गालों, माथे, नाक और ऊपरी होंठ पर नजर आते हैं। यह समस्या महिलाओं और पुरुषों दोनों में हो सकती है, लेकिन महिलाओं में यह अधिक देखी जाती है।
क्यों होती है झाइयों की समस्या?
झाइयों के मुख्य कारणों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. लोहनी ने बताया कि सूरज की तेज रोशनी (सन एक्सपोजर) इसका सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव, विशेषकर गर्भावस्था के दौरान, गलत स्किनकेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल और कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव के कारण भी चेहरे पर झाइयां उभर आती हैं।
इलाज और बचाव की सही राह
अक्सर लोग झाइयों को खुद ठीक होने वाली समस्या मान लेते हैं, लेकिन डॉ. लोहनी ने स्पष्ट किया कि ज्यादातर मामलों में यह खुद ठीक नहीं होता और इलाज न मिलने पर बढ़ भी सकता है। उन्होंने बताया कि केवल क्रीम लगाने से हर बार फायदा नहीं होता। कई बार मरीज की त्वचा के अनुसार एडवांस ट्रीटमेंट की भी जरूरत पड़ती है। इलाज के तौर पर मेडिकल क्रीम, केमिकल पील्स और लेजर ट्रीटमेंट का सहारा लिया जाता है।
सनस्क्रीन का महत्व और घरेलू नुस्खों से बचाव
डॉ. लोहनी ने जोर देते हुए कहा कि झाइयों के इलाज में सनस्क्रीन की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। बिना सनस्क्रीन के कोई भी इलाज कारगर साबित नहीं होगा। रोजाना एसपीएफ 30 या उससे ऊपर का सनस्क्रीन लगाना अनिवार्य है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि लोग अक्सर नींबू या बेकिंग सोडा जैसे घरेलू नुस्खे अपनाते हैं, जो त्वचा को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।
सावधानी ही है समाधान
मेलाज्मा एक क्रोनिक कंडीशन है,और ये दोबारा भी आ सकता है। डॉ. लोहनी ने सलाह दी कि चेहरे पर जिद्दी दाग होने पर खुद से डॉक्टर न बनें और किसी योग्य डर्मेटोलॉजिस्ट (त्वचा विशेषज्ञ) से परामर्श लें। सही डायग्नोसिस और समय पर इलाज ही आपकी त्वचा को दोबारा सुरक्षित और चमकदार बना सकता है।


