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ऋषिकेश ट्रांजिट कैंप में फूटा तीर्थयात्रियों का गुस्सा, खुले आसमान तले रुकने को मजबूर

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चारधाम यात्रा पर आए श्रद्धालुओं का सब्र अब जवाब देने लगा है। ऋषिकेश के ट्रांजिट कैंप में खुले आसमान के नीचे रुकने को मजबूर तीर्थयात्रियों ने शुक्रवार को अपना आक्रोश व्यक्त किया। पंजीकरण की नई गाइडलाइन के चलते प्रदेश में पहले ही पहुंच चुके यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई दिनों से ट्रांजिट कैंप में रुके श्रद्धालुओं ने आज विरोध प्रदर्शन किया।

गौरतलब हो, यात्रा व्यवस्था पूरी तरह से बेपटरी हो गई है। बृहस्पतिवार को गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय और आईजी करन नगन्याल ने स्थिति को नियंत्रण में लाने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें कोई सफलता नहीं मिली। ट्रांजिट कैंप में प्रशासन के दावे हवा साबित हो रहे हैं। कैंप में जगह-जगह तीर्थयात्री अपनी बसों के साये में खुले में सोने को मजबूर हैं। प्रशासन ने दावा किया था कि जिन यात्रियों को पंजीकरण के लिए रुकना पड़ेगा, उनके रहने और खाने की व्यवस्था प्रशासन करेगा। लेकिन हकीकत में तीर्थयात्री खुद ही अपने भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि अब उनके पास भोजन सामग्री भी खत्म होने वाली है।

ट्रांजिट कैंप में कई यात्री 11 मई से रुके हुए हैं। ग्वालियर के मुल्लू सिंह ने बताया कि वह 50 लोगों के साथ 11 मई को कैंप में पहुंचे थे, लेकिन आज तक उनका पंजीकरण नहीं हुआ है। उनका यात्रा कार्यक्रम 12 मई से 22 मई तक का था, लेकिन अब 19 मई तक भी उनका पंजीकरण नहीं हो पाएगा।

बता दें, उत्तराखंड प्रशासन की कमी का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। ग्वालियर की ही ममता जैन ने बताया कि वह अपने पति के साथ चारधाम यात्रा के लिए आई हैं। उनका 13 मई का ऑनलाइन पंजीकरण था, लेकिन ट्रांजिट कैंप में मौजूद अधिकारियों ने उन्हें बताया कि यह पंजीकरण मान्य नहीं है। ममता ने कहा कि उनके अन्य साथी यात्रा पर जा चुके हैं, लेकिन उन्हें जबरन रोक दिया गया है।

बृहस्पतिवार को प्रशासन ने जांच के नाम पर भद्रकाली में वाहनों को रोकना शुरू किया, जिसके कारण भद्रकाली से नटराज चौक तक करीब डेढ़ किलोमीटर लंबा जाम लग गया। प्रशासन ने कुल 500 से ज़्यादा वाहनों को रोका है, जिसमें 200 ट्रांजिट कैंप में, 150 भद्रकाली में, 125 चंबा में और 25 छाम में रोके गए हैं।