झारखंड के होनहार छात्रों के लिए खुला विदेश में पढ़ाई का रास्ता, सरकार की छात्रवृत्ति योजना बनी उम्मीद की किरण

रांची से एक बड़ी खबर आई है जो उन तमाम छात्रों के लिए राहत लेकर आई है जो विदेश जाकर ऊंची पढ़ाई का सपना तो…

रांची से एक बड़ी खबर आई है जो उन तमाम छात्रों के लिए राहत लेकर आई है जो विदेश जाकर ऊंची पढ़ाई का सपना तो देखते हैं लेकिन जेब की हालत अक्सर इस ख्वाब के रास्ते में दीवार बन जाती है। झारखंड सरकार ने ऐसे बच्चों के लिए एक मजबूत कदम उठाया है। सरकार ने एक खास योजना की शुरुआत की है जिसका नाम है मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना। इस योजना का मकसद है कि झारखंड के होनहार और मेहनती बच्चे सिर्फ पैसों की वजह से अपने सपने को अधूरा न छोड़ दें।

इस योजना की शुरुआत साल दो हजार इक्कीस में हुई थी। शुरुआत में केवल दस छात्रों को इसका लाभ मिल रहा था। लेकिन इसके बाद सरकार ने इस योजना में बड़ा बदलाव किया और विद्यार्थियों की संख्या को बढ़ाकर पच्चीस कर दिया। अब खबर ये है कि सरकार इसे और भी बड़ा रूप देने जा रही है और जल्द ही पचास छात्रों को सालाना विदेश भेजे जाने का रास्ता खुलेगा। इस बारे में अधिसूचना जल्द जारी होने की उम्मीद है।

21e7b59e-b909-45ce-800c-4b81d0841272

जो छात्र विदेश जाकर मास्टर्स या एमफिल करना चाहते हैं उनके लिए ये योजना किसी वरदान से कम नहीं। आवेदन करने के लिए छात्रों को सरकार की वेबसाइट www.mgos.jharkhand.gov.in पर जाना होगा। इसके बाद सभी आवेदनों की जांच होगी और इंटरव्यू के जरिए पच्चीस नामों को फाइनल किया जाएगा। इस चयन प्रक्रिया में हर वर्ग का ख्याल रखा गया है। अनुसूचित जनजाति से दस छात्र, अनुसूचित जाति से पांच, पिछड़ा वर्ग से सात और अल्पसंख्यक वर्ग से तीन छात्रों को इस छात्रवृत्ति का लाभ मिलेगा।

राज्य सरकार इन चुने गए छात्रों को यूनाइटेड किंगडम यानी ब्रिटेन के प्रतिष्ठित संस्थानों में भेजेगी। वहां की पढ़ाई का पूरा खर्च झारखंड सरकार खुद उठाएगी। छात्रवृत्ति में ट्यूशन फीस से लेकर रहने खाने तक की पूरी सुविधा शामिल होगी। इस योजना के तहत अधिकतम उम्र पैंतीस साल रखी गई है और कुल इकतीस अलग अलग विषयों में मास्टर्स और एमफिल की पढ़ाई के लिए छात्रों को विदेश भेजा जाएगा।

अगर किसी छात्र को आवेदन के दौरान कोई दिक्कत आती है या किसी जानकारी की जरूरत होती है तो वो कल्याण विभाग से सीधे संपर्क कर सकता है। इसके लिए विभाग ने एक वाट्सऐप नंबर भी जारी किया है ताकि छात्रों को किसी भी तरह की परेशानी न हो। कल्याण आयुक्त अजय नाथ झा ने बताया कि यह योजना राज्य सरकार की एक बड़ी पहल है और इसका उद्देश्य है कि झारखंड के होनहार बच्चे सिर्फ राज्य या देश तक सीमित न रहें बल्कि विदेश जाकर भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाएं।

इस योजना की नींव तब रखी गई जब हेमंत सोरेन सरकार का एक साल पूरा हुआ था। उन एक साल की उपलब्धियों को यादगार बनाने के लिए इस छात्रवृत्ति की घोषणा की गई थी। अब ये योजना उन छात्रों के लिए उम्मीद का दरवाजा बन चुकी है जो सीमित साधनों के बावजूद ऊंचे मकसद लेकर मेहनत करते हैं। सरकार की ये पहल दिखाती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो रास्ता खुद-ब-खुद बनता चला जाता है।