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Kisan andolan- उत्तराखंड की आंदोलनकारी ताकतें आंदोलन के समर्थन में चलाएंगी अभियान, गाजीपुर बार्डर पहुंचे उत्तराखंड के नेता

उत्तराखंड के जन आंदोलनकारियों ने गाजीपुर बार्डर पर किसान नेताओं से मिलकर एकजुटता जाहिर की और कहा कि kisan andolan के समर्थन में उत्तराखंड में…

उत्तराखंड के जन आंदोलनकारियों ने गाजीपुर बार्डर पर किसान नेताओं से मिलकर एकजुटता जाहिर की और कहा कि kisan andolan के समर्थन में उत्तराखंड में भी अभीयान चलाया जाएगा

अल्मोड़ा, 11 फरवरी 2021- कृषि सुधार के नाम पर लाए गए तीन काले कानूनों को लेकर चल रहे किसान आंदोलन Kisan andolan को उत्तराखंड से भी लगातार भरपूर समर्थन मिल रहा है।

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इसी सिलसिले में प्रखर उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी प्रभात ध्यानी, काशीपुर से किसान नेता अवतार सिंह तथा चिपको, नशा नहीं रोजगार दो और नानीसार जैसे जन आंदोलन के नेतृत्वकारी पी.सी. तिवारी ने गाजीपुर बॉर्डर पर पिछले ढाई माह से बैठे किसानों, किसान नेताओं से मुलाकात की और उन्हें उत्तराखंड का जल भेंट कर आंदोलन के साथ अपनी एकजुटता जाहिर की। साथ ही उत्तराखंड में किसान आंदोलन के समर्थन में अभियान चलाने की बात करते हुए कहा कि आंदोलनकारियों के प्रति प्रधानमंत्री की भाषा से प्रधानमंत्री पद की गरिमा कम कम हुई है।


गाजीपुर बॉर्डर पर किसान आंदोलन Kisan andolan के मंच पर आंदोलन के प्रखर एवं चर्चित नेता राकेश टिकैत और उनके साथियों ने उत्तराखंड की पहल का स्वागत किया। इसके बाद आंदोलन के मंच से उत्तराखंडी नेताओं ने अपने संबोधन में केंद्र की मोदी सरकार पर अंबानी, अडानी जैसे पूंजीपतियों के हित में लाए जा रहे इन काले कानूनों का विरोध करते हुए उन्हें वापस लेने की मांग की।

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साथ ही प्रधानमंत्री मोदी द्वारा संसद में आंदोलनकारियों को परजीवी कहने की तीव्र भर्त्सना करते हुए कहा कि देश के प्रधानमंत्री की भाषा उनकी निम्न सोच, तंग खयाली और बौखलाहट का प्रतीक है, जिससे प्रधानमंत्री पद की गरिमा कम हुई है। तिवारी तथा प्रभात ध्यानी ने कहा कि किसान आंदोलन Kisan andolan के दमन की साजिशें बर्दाश्त नहीं होंगी। उत्तराखंड में भी किसान आंदोलन के समर्थन में अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने तीनों काले कृषि कानून वापस लेने और न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी लेने की मांग की।

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