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Uttarakhand- तीन माह के भीतर गुरिल्लों को नौकरी और सेवानिवृत्ति के लाभ देने के आदेश जारी

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नैनीताल। लगभग 16 वर्षों से उत्तराखंड में आंदोलनरत हजारों गुरिल्लों को उत्तराखंड हाईकोर्ट के एक फैसले ने बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने उत्तराखंड में एसएसबी के गुरिल्लों और उनकी विधवाओं को मणिपुर राज्य की तरह नौकरी और सेवानिवृत्ति के लाभ तीन माह के भीतर देने के आदेश दिए हैं। इस आदेश से राज्य के 20 हजार से अधिक गुरिल्लों और उनके परिवारों को लाभ होगा। उत्तराखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।

बताते चलें कि टिहरी गढ़वाल निवासी एक गुरिल्ले की विधवा अनुसूइया देवी, पिथौरागढ़ के मोहन सिंह और 29 अन्य लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। वर्ष 2004 में पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट के स्वयंसेवकों ने संगठन बनाकर पूर्वोत्तर की तरह उत्तराखंड और अन्य प्रांतों के स्वयंसेवकों को भी समायोजित करने, 40 वर्ष से अधिक उम्र के स्वयंसेवकों और उनके आश्रितों को पेंशन देने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया। केपी रावल को संगठन का अध्यक्ष चुना गया। स्वर्गीय महेश लाल साह जुगल, राजेंद्र चौधरी आदि संस्थापक सदस्य थे।

आंदोलन का दायरा तेजी से पिथौरागढ़ से लेकर अल्मोड़ा तक फैल गया। अल्मोड़ा में कुमाऊं के गुरिल्लों की बैठक में बृहद संगठन की रूपरेखा तैयार की गई। वरिष्ठ गुरिल्ला ब्रह्मानंद डालाकोटी को संगठन का केंद्रीय अध्यक्ष, केपी रावल को संस्थापक संरक्षक, शिवराज बनोला समेत तमाम वरिष्ठ गुरुजनों को संगठन में अहम जिम्मेदारी दी गई।

वहीं आदेश आने के बाद गुरिल्ला संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष ब्रह्मानंद डालाकोटी का कहना है कि केंद्र सरकार को हाईकोर्ट के फैसले पर तत्काल अमल करना चाहिए और प्रशिक्षित गुरिल्लों का राष्ट्रहित में इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उम्र दराज गुरिल्लों और दि उनके आश्रितों को पेंशन देनी चाहिए।

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