उत्तराखंड एकता मंच ने गढ़वाली और कुमाऊंनी समुदाय को ‘ट्राइब स्टेटस’ यानी जनजातीय दर्जा दिलाने के लिए अपनी मुहिम तेज कर दी है।
बीते दिवस अल्मोड़ा के उत्तराखंड प्रेस क्लब में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंच के पदाधिकारियों ने दो टूक चेतावनी दी कि अब पहाड़ का समाज सिर्फ उसी राजनीतिक दल या प्रत्याशी को वोट देगा, जो अपने चुनावी घोषणा पत्र में ‘5वीं अनुसूची’ और ‘ट्राइब स्टेटस’ के मुद्दे को लिखित में शामिल करेगा।
मंच के नेताओं ने कहा कि देश के अन्य सभी 12 हिमालयी राज्यों के मूल निवासियों को यह दर्जा मिला हुआ है, लेकिन उत्तराखंड के पर्वतीय समाज को इससे दूर रखकर उनके साथ ऐतिहासिक अन्याय किया गया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र रावत ने कहा कि देश के सभी 12 हिमालयी राज्यों के मूल निवासियों को ट्राइब स्टेटस का अधिकार प्राप्त है, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि उत्तराखंड का गढ़वाली-कुमाऊंनी समुदाय आज भी इस बुनियादी अधिकार से महरूम है। वहीं दरबान सिंह सुगड़ा ने पुराने नियमों की याद दिलाते हुए बताया कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में साल 1972 तक ट्राइबल कानून लागू थे। इन नियमों के तहत पहाड़ी समुदाय का अपने जल, जंगल और जमीन पर पूरा अधिकार सुरक्षित था, जिसे बाद में सरकारों ने धीरे-धीरे हटा लिया।
हल्द्वानी अध्यक्ष सुरेंद्र राठौड़ ने जनजातीय दर्जा मिलने से होने वाले बड़े फायदों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह दर्जा मिलने से पहाड़ के युवाओं को उच्च शिक्षा, रोजगार और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का सीधा लाभ मिलेगा।
सुरेंद्र राठौड़ ने कहा कि जनजातीय दर्जा मिलने से पहाड़ के जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय समाज का मालिकाना हक वापस मिल जाएगा। साथ ही पेसा एक्ट लागू होने से गांवों की ग्राम सभाएं बेहद शक्तिशाली हो जाएंगी। इसके लागू होते ही मूल निवास 1950 और देश का सबसे मजबूत भू-कानून उत्तराखंड में अपने आप लागू हो जाएगा, जिससे यहां की अनूठी संस्कृति और पहचान को हमेशा के लिए संवैधानिक सुरक्षा मिल जाएगी।
मंच के पदाधिकारी विक्रम ने कहा कि अब सिर्फ खोखले वादों से काम नहीं चलेगा। इस बार पूरा गढ़वाली-कुमाऊंनी समुदाय चुनाव में वोट की चोट से अपना जवाब देगा। मंच के संयोजक अनूप बिष्ट और निशांत रौथाण ने कहा कि एकता मंच इस मांग को अब एक बड़ा जन-आंदोलन बनाने की दिशा में प्रयास कर रहा है और ट्राइब स्टेटस के मुद्दे को पहाड़ के हर घर-घर तक पहुंचाया जाएगा।
प्रेस वार्ता में उत्तराखंड एकता मंच के संयोजक अनूप बिष्ट, हल्द्वानी कॉर्डिनेटर संजय राठौड़, प्रचारक निशांत रौथाण, विक्रम, दरबान सिंह सुगड़ा, प्रवेश जोशी, नरेंद्र सती और प्रयाग सिंह जीना सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
