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श्रद्धांजलि राजेंद्र प्रसाद जोशी::उत्तराखंड ने खोई एक और विभूति

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Tribute to Rajendra Prasad Joshi: Uttarakhand lost another personality

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अल्मोड़ा, 28 अक्टूबर -पिछले दिनों उत्तराखण्ड की एक और विभूति हमसे दूर हो गयी।
उत्तर प्रदेश के भूतपूर्व पुलिस महानिदेशक तथा इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व प्रमुख राजेन्द्र प्रसाद जोशी का 14 अक्टूबर को नौएडा के एक निजी अस्पताल में स्वर्गवास हो गया । वे लम्बे समय से अस्वस्थ चल रहे थे।

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मूल रूप से अल्मोड़ा के सेलाखोला से ताल्लुक रखने वाले राजेंद्र प्रसाद जोशी का जन्म 1933 में मसूरी में हुआ था जहां इनके पिता सुरेश चंद्र जोशी बार्लोगंज स्थित मशहूर सेंट जाॅर्ज़ेज़ स्कूल में बर्सर थे । स्कूली शिक्षा यहीं से करने के उपरान्त इन्होंने उच्च शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से प्राप्त की । 1955 में इनका चयन भारतीय पुलिस सेवा में हो गया और उत्तर प्रदेश में ही तैनाती मिली । यहां पर यह बताना आवश्यक है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के इतिहास में 1955 के बैच को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है जिसने देश को टी.एन.सेशन अनेक कुशल प्रशासक दिये ।

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सेवा के दौरान श्री जोशी ने उरई,जालौन तथा सीतापुर में विभिन्न पदों पर कार्य किया, लखनऊ में पीए टू आईजी रहे,तथा समय समय पर उत्कृष्ट सेवा के लिए सम्मानित होते रहे । 1972 के पश्चात इंटेलिजेंस ब्यूरो की सेवा में पूर्वोत्तर भारत में कई साल तैनात रहे।

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अस्सी के दशक में कुछ वर्ष लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग में कार्य किया। वहां से लौटने पर उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक नियुक्त हुए । इस पद पर आसीन होने वाले वे उत्तराखण्ड के पहले अधिकारी थे । ये समय बहुत चुनौतीपूर्ण था। मंडल और राम मंदिर के मसलों के कारण स्थिति अत्यंत संवेदनशील थी । साम्प्रदायिक सौहार्द्र तथा कानून व्यवस्था को बनाये रखने में भरसक प्रयास किये ।

1989 में विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार द्वारा इंटेलिजेंस ब्यूरो का निदेशक बनाया गया जो कि आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण पद होता है । इसके पश्चात चेयरमैन ज्वाइंट इंटेलिजेंस कमिटी का पदभार संभाला । मार्च, 1992 में सेवानिवृत्त हो गये। इनकी छवि एक ईमानदार एवं कर्तव्यनिष्ठ नौकरशाह की रही।

स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद जोशी की पारिवारिक पृष्ठभूमि शिक्षकों तथा प्रशासकों की रही । जाने माने समाजशास्त्री तथा कुमाऊं विश्वविद्यालय के भूतपूर्व कुलपति प्रोफेसर भूपेंद्र कुमार जोशी,जो वर्तमान में दून लाइब्रेरी के अध्यक्ष हैं,इनके अनुज हैं ।पूर्व कैबिनेट सचिव तथा राज्यपाल पद्म विभूषण स्वर्गीय भैरव दत्त पाण्डे, पूर्व कैबिनेट सचिव कमल पाण्डे,तथा केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सी.आर.पी.एफ.) के पूर्व महानिदेशक सतीश दत्त पाण्डेय, तीनों इनके साढ़ू भाई हैं। इनकी पत्नी डॉक्टर तारा जोशी (जिनका निधन अप्रैल, 2021 में हो गया था) के सबसे बड़े भाई प्रोफेसर गोविंद चंद्र पाण्डे विख्यात इतिहासकार थे तथा जयपुर और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति रहे । दूसरे भाई विनोद पाण्डे भी भारत के कैबिनेट सचिव रहे और बाद में बिहार एवं अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल।
स्वर्गीय जोशी अपने पीछे पुत्री रचना तथा पुत्र समीर को छोड़ गये हैं।


(आलेख प्रो. अनिल जोशी )