देश को मिला नया सीजेआई बीआर गवई, पहले बौद्ध और दूसरे दलित बनकर रचा इतिहास , बोले काम करके दिखाऊंगा

बीआर गवई ने आज सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की कुर्सी संभाल ली. राष्ट्रपति भवन में हुए एक सादे कार्यक्रम में उन्होंने हिंदी में शपथ…

बीआर गवई ने आज सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की कुर्सी संभाल ली. राष्ट्रपति भवन में हुए एक सादे कार्यक्रम में उन्होंने हिंदी में शपथ ली. देश को मिला अपना 52वां चीफ जस्टिस. गवई इस पद पर पहुंचने वाले पहले बौद्ध और दूसरे दलित बने हैं. उनसे पहले केजी बालकृष्णन ने ये जिम्मेदारी निभाई थी.

गवई ने संजीव खन्ना की जगह ली है जो मंगलवार को रिटायर हुए. साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे गवई अब करीब छह महीने तक इस जिम्मेदारी को निभाएंगे. उनका कार्यकाल नवंबर तक रहेगा.

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शपथ लेने से पहले उन्होंने साफ कर दिया था कि उनका ध्यान सिर्फ दो बातों पर रहेगा. एक तो निचली अदालतों की हालत को बेहतर करना और दूसरा ये कि लंबित मामलों की संख्या को कैसे घटाया जाए. उन्होंने माना कि उनके पास वक्त ज्यादा नहीं है लेकिन जितना हो सकेगा उतना काम जरूर करेंगे.

गवई ने एक इंटरव्यू में बताया कि कोर्ट में केसों की लिस्टिंग जिस तरह से होती है उसमें सुधार जरूरी है. दो दिन कम अहम मामलों में और सिर्फ एक दिन जरूरी मामलों में सुनवाई होती है जिससे जरूरी केस अटक जाते हैं. उन्होंने कहा कि वो इस पर बाकी जजों से बात करेंगे और कोई अच्छा रास्ता निकालने की कोशिश करेंगे.

हाल में एक जज के घर से कैश मिलने की खबर पर गवई ने साफ कहा कि पूरे देश में नौ सौ जज हैं लेकिन ऐसे मामले बेहद कम हैं. मगर इतने भी बर्दाश्त नहीं किए जा सकते. उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच के जो नियम हैं उनके मुताबिक ही सब होगा.

जजों की नियुक्ति में देरी और पारदर्शिता पर भी उन्होंने बात रखी. बोले कि सरकार से बातचीत करके जल्द से जल्द नियुक्तियों का रास्ता निकाला जाएगा. पारदर्शिता होनी चाहिए लेकिन काबिलियत भी देखी जानी जरूरी है.

उन्होंने माना कि उन्हें तेज़ी से पदोन्नति मिली ताकि सुप्रीम कोर्ट में दलितों की आवाज बनी रहे. बोले कि जब अलग अलग पृष्ठभूमियों से लोग अदालत में होते हैं तो फैसले ज्यादा समझदारी से होते हैं.

सोशल मीडिया पर आने वाली आलोचनाओं पर उन्होंने कहा कि वो कभी भी दबाव में आकर फैसले नहीं लेते. बोले कि वो न इंस्टाग्राम देखते हैं न एक्स. जो सही है वही करना चाहिए चाहे कोई कुछ भी बोले.

तकनीक पर भी उनका रुख साफ है. उन्होंने कहा कि जो शुरुआत पिछले सीजेआई ने की थी उसे और बेहतर बनाया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट में तकनीकी बदलाव जारी रहेंगे.

आखिर में उन्होंने ये भी कहा कि रिटायर होने के बाद किसी भी सरकारी पद को स्वीकार नहीं करेंगे. बोले कि वो सिर्फ अपना काम करना चाहते हैं और बस.