उत्तराखंड के कृषि, उद्यान और सगंध पौधा विभाग से जुड़ा एक प्रस्तावित विदेशी दौरा इन दिनों चर्चा में है। वजह यह नहीं कि दुबई में होने वाले गल्फूड फेस्टिवल–2026 में राज्य के उत्पादों को लेकर बड़ी उम्मीदें थीं, बल्कि यह कि इस महत्वपूर्ण आयोजन में जाने वाला प्रतिनिधिमंडल अंतिम समय में ही रुक गया। इससे विभाग की कार्यशैली और तैयारियों पर सवाल उठने लगे हैं।
दरअसल, 26 से 30 जनवरी 2026 तक दुबई में आयोजित होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय फूड फेस्टिवल में उत्तराखंड के कृषि और सगंध पौधा उत्पादों को प्रदर्शित करने की योजना लंबे समय से बन रही थी। इसके लिए विभाग ने कृषि सचिव, सेंट्रल अरोमा प्लांट्स यूनिट के निदेशक (CAP), संयुक्त निदेशक कृषि दिनेश कुमार, मुख्य कार्यकारी अधिकारी नरेंद्र यादव और एक मार्केटिंग अधिकारी को शामिल करते हुए एक प्रतिनिधिमंडल का प्रस्ताव तैयार किया था।
लेकिन यात्रा शुरू होने से पहले ही पूरा मामला अटक गया।
जानकारी के मुताबिक आयोजन से ठीक एक दिन पहले तक यह उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री कार्यालय से विदेश यात्रा की स्वीकृति मिल जाएगी, लेकिन अंतिम समय पर मंजूरी न मिलने के चलते पूरी टीम को दौरा रद्द करना पड़ा। अब यह माना जा रहा है कि प्रस्ताव समय पर आगे न बढ़ने और जरूरी दस्तावेज तैयार न हो पाने की वजह से यह स्थिति बनी।
नियमों के अनुसार विदेश यात्राओं से जुड़े सभी दस्तावेज और अनुमतियां पहले से पूरी हो जानी चाहिए थीं, लेकिन इस मामले में समयसीमा का पालन नहीं हो पाया। नतीजतन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिनिधिमंडल को अनुमति देने से इनकार कर दिया।
इस घटनाक्रम पर कृषि मंत्री गणेश जोशी ने भी विभागीय अफसरों पर सख्ती दिखाते हुए कहा कि इस तरह की यात्राओं में समय पर तैयारी बेहद जरूरी होती है। उन्होंने साफ कहा कि यदि औपचारिकताएं तय समय तक पूरी न हों, तो सरकार के पास स्वीकृति देने का आधार ही नहीं बचता। उनके बयान से यह भी संकेत मिला कि मुख्यमंत्री द्वारा अनुमति रोकने के पीछे मुख्य कारण यही था कि आयोजन शुरू होने तक दस्तावेज पूरे नहीं थे।
गौरतलब है कि गल्फूड फेस्टिवल दुनिया के बड़े फूड और एग्री उत्पाद कार्यक्रमों में गिना जाता है, जहां कई देशों के उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलती है। ऐसे में यह मौका उत्तराखंड के लिए काफी अहम माना जा रहा था, लेकिन तैयारी की कमी के कारण राज्य इस मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने से चूक गया।
