युवाओं को स्वरोजगार, स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने को उत्तराखंड पारंपरिक उत्थान समिति करेंगी पहल.j

पिथौरागढ़। जनपद में आम लोगों की आजीविका में सुधार लाने के लिए उत्तराखंड पारंपरिक उत्थान समिति चरणबद्ध तरीके से कार्य करेगी। समिति युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के साथ उनके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित करेगी और स्थानीय उत्पादों तथा लोक संस्कृति के विभिन्न रूपों और कलाओं को पुनर्जीवित व संरक्षित करने का भी कार्य करेगी।


अपनी इन योजनाओं और शुरू किए गए कार्यक्रमों के बारे में जानकारी देते हुए समिति के अध्यक्ष राम सिंह ने शुक्रवार को यहां पत्रकारों से बातचीत में यह बात कही। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र में बेरोजगारी एक गंभीर समस्या के रूप में आ खड़ी हुई है। कोरोना महामारी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या और तेज गति से बढ़ गई है। ऐसे में लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने की जरूरत है। प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत अभियान को साकार करने के उद्देश्य से ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं को उनकी योग्यता अनुसार प्रशिक्षित कर स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि समिति अपने संसाधनों से आजीविका सुधार के कार्यक्रमों का संचालन करेगी।


ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादित होने वाली जैविक फसलों, फलों को उचित बाजार तक पहुंचाने को समिति विशेष प्रबंध करेगी। उत्तराखंड में विलुप्त हो रही सांस्कृतिक धरोहर जागर, फाग, रमोल और सातूं-आठूं जैसे पर्वों को प्रोत्साहित करने के लिए प्राथमिकता से कार्य किया जाएगा। समिति अध्यक्ष राम सिंह ने बताया कि जनपद में आजीविका सुधार कार्यक्रमों की शुरुआत जल्द की जाएगी। समिति का लक्ष्य सीमांत जनपदों के साथ पूरे उत्तराखंड में इन कार्यक्रमों को एक अभियान के रूप में संचालित करना है। इस अवसर पर समिति की निदेशक प्रगति नीरज सिंह, संरक्षक शमशेर महर, चंद्र सिंह और सलाहकार डॉक्टर नीरज सिंह आदि मौजूद थे।

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