पेट्रोल-डीजल पर लगी पाबंदी हटी: इस दिन से पेट्रोल पंपों से असीमित तेल खरीद सकेंगे कमर्शियल खरीदार

नई दिल्ली। देश के ट्रांसपोर्टर्स, बस-ट्रक मालिकों और व्यावसायिक खरीदारों के लिए केंद्र सरकार की ओर से एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई…

Petrol diesel

नई दिल्ली। देश के ट्रांसपोर्टर्स, बस-ट्रक मालिकों और व्यावसायिक खरीदारों के लिए केंद्र सरकार की ओर से एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। भारत सरकार ने कमर्शियल खरीदारों के लिए पेट्रोल और डीजल की रिटेल (खुदरा) बिक्री पर लगाई गई सभी अस्थायी पाबंदियों को पूरी तरह से हटा दिया है,ये फैसला 1 जुलाई से लागू होगा।

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यह फैसला मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी संघर्ष के कारण ग्लोबल एनर्जी ट्रेड में आई रुकावटों के बाद घरेलू ईंधन आपूर्ति को सुरक्षित करने के लिए उठाए गए आपातकालीन कदमों की समीक्षा के बाद लिया गया है।

सरकार के इस ताजा फैसले का सीधा मतलब यह है कि अब से कोई भी व्यावसायिक खरीदार (जैसे ट्रकिंग कंपनियां या बस संचालक) बिना किसी मात्रा की सीमा के सीधे पेट्रोल पंपों से खुदरा दरों पर फ्यूल खरीद सकेंगे। इस कदम से कमर्शियल ऑपरेटर्स की परिचालन लागत (लागत मूल्य) में भारी कमी आने की उम्मीद है।

क्यों लगाई गई थी 200 लीटर की दैनिक सीमा?

ग्लोबल स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव (Jiopolitical Tension) और सप्लाई चेन बाधित होने के बाद घरेलू बाजार में तेल की जमाखोरी और कमी की आशंका बढ़ गई थी। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने जून महीने में आपातकालीन नियम लागू किए थे। इसके तहत कमर्शियल यूजर्स को सीधे रिटेल आउटलेट्स से भारी मात्रा में फ्यूल खरीदने से रोक दिया गया था और डीजल की बिक्री को प्रति ग्राहक या प्रति वाहन अधिकतम 200 लीटर प्रति दिन तक सीमित कर दिया गया था।

जून में जारी इस आदेश का मुख्य उद्देश्य पेट्रोल-डीजल की समान उपलब्धता सुनिश्चित करना, ईंधन के गलत इस्तेमाल व जमाखोरी को रोकना और आम जनता के लिए बिना रुकावट सही कीमतों पर सप्लाई बनाए रखना था।

बल्क और रिटेल कीमतों के अंतर से पैदा हुआ था संकट

दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में उथल-पुथल के बीच बल्क (थोक) सप्लाई और खुदरा (रिटेल) कीमतों के बीच प्रति लीटर अंतर काफी बढ़ गया था। इंडस्ट्रियल यूजर्स को दिए जाने वाले बल्क डीजल की कीमत रिटेल प्राइस से लगभग ₹40 प्रति लीटर अधिक हो गई थी। इस भारी अंतर (आर्बिट्रेज) के कारण ट्रकिंग कंपनियों सहित तमाम कमर्शियल कंज्यूमर थोक पॉइंट के बजाय सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) के रिटेल पेट्रोल पंपों पर कतार लगाने लगे, क्योंकि वहां डीजल काफी सस्ता मिल रहा था।

भारत की कुल ईंधन मांग में लगभग 40% हिस्सेदारी अकेले डीजल की है। अचानक खुदरा आउटलेट्स पर कमर्शियल गाड़ियों का दबाव बढ़ने से देश के कई हिस्सों में फ्यूल स्टेशनों पर सप्लाई का संकट खड़ा हो गया था।

सरकारी तेल कंपनियों पर बढ़ा था दबाव: खुदरा मांग में इस अप्रत्याशित उछाल का सबसे बड़ा असर सरकारी तेल कंपनियों (इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम) पर पड़ा था, जो देश के 1 लाख से अधिक फ्यूल स्टेशनों में से लगभग 90% का संचालन करती हैं। इस दौरान प्राइवेट रिटेलर्स (जो मार्केट रेट पर तेल बेच रहे थे) की बिक्री लगभग ठप हो गई थी, जबकि सरकारी पंपों पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी।

हालात सामान्य होने पर लिया गया फैसला

रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के नेट एक्सपोर्टर होने के बावजूद भारत ने घरेलू सुरक्षा के लिए ये अस्थायी प्रतिबंध लगाए थे। अब सरकार का मानना है कि देश में ईंधन की घरेलू आपूर्ति पूरी तरह सामान्य हो चुकी है और सप्लाई चेन सुदृढ़ है। इसी को देखते हुए 1 जुलाई से इन इमरजेंसी पाबंदियों को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है, जिससे पूरे लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को बड़ी राहत मिलेगी।

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