अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस (May Day) के मौके पर आज अल्मोड़ा का चौघानपाटा स्थित गांधी पार्क मजदूरों, कर्मचारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के संघर्ष का गवाह बना। विभिन्न संगठनों ने एक मंच पर आकर सामूहिक धरने के माध्यम से अपनी मांगों को बुलंद किया और मजदूर अधिकारों के प्रति एकजुटता दिखाई।
कार्यक्रम की शुरुआत में वर्ष 1886 में शिकागो में अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए प्राणों की आहुति देने वाले शहीद मजदूरों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित प्रतिनिधियों ने संकल्प लिया कि वे उन शहीदों के संघर्षों को आगे बढ़ाएंगे और श्रम अधिकारों की रक्षा करेंगे। इस सभा में उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (उपपा), उत्तराखंड पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन और पेंशनर्स संगठन सहित कई मजदूर संगठनों ने हिस्सा लिया।
लेबर कोड और पुरानी पेंशन पर सरकार की घेराबंदी
सभा में वक्ताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया। वक्ताओं ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए ‘लेबर कोड’ को श्रमिक विरोधी बताते हुए इसे तुरंत समाप्त करने की मांग की गई। कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन को अपना हक बताते हुए इसे बहाल करने के लिए जोरदार तरीके से आवाज उठाई। वक्ताओं ने कार्यस्थल पर सुरक्षित वातावरण, ठेकेदारी प्रथा की समाप्ति और सम्मानजनक न्यूनतम मजदूरी को प्रमुखता से उठाया। समान कार्य के लिए समान वेतन के नारे के साथ कर्मचारियों के शोषण को बंद करने की मांग की गई।
वक्ताओं ने कहा कि सरकार की वर्तमान नीतियों के कारण देश के मजदूरों और किसानों की आर्थिक स्थिति लगातार गिर रही है। उन्होंने बढ़ती बेरोजगारी पर चिंता जताते हुए कहा कि लाखों शिक्षित युवा आज रोजगार के लिए भटक रहे हैं, लेकिन सरकार ठोस कदम उठाने में पूरी तरह विफल रही है। सभा के दौरान “मजदूर एकता जिंदाबाद” और “मजदूरों का उत्पीड़न बंद करो” जैसे नारों से पार्क गूंज उठा।
इस मौके पर पी.एस. बोरा, रमेश चंद्र पाण्डेय, मनोज जोशी (अध्यक्ष, पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन), धीरेन्द्र कुमार पाठक, गणेश भण्डारी (अध्यक्ष, पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन),उपपा के केंद्रीय अध्यक्ष पी.सी. तिवारी सहित दर्जनों संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता देवेन्द्र सिंह फर्त्याल ने की, संचालन चन्द्रमणि भट्ट ने किया।



