Folk culture
Folk culture

Many forms of folk culture

पिथौरागढ़ सहयोगी, 22 जुलाई 2020
सीमांत क्षेत्र की भोटिया जनजाति में प्रचलित लोक कथाओं के संकलन के लिए कार्यशालाओं का आयोजन शुरू हो गया है। इसका उद्देश्य लोक संस्कृति (Folk culture)
का संरक्षण करना है।

कार्यशालाओं का आयोजन पर्वतीय सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कला समिति कर रही है। संस्कृति निदेशालय उत्तराखंड के सहयोग से आयोजित इन कार्यशालाओं में आयोजक संस्था के कार्यकर्ता लोक कथाओं का संकलन कर रहे हैं, जिन्हें पुस्तक के रूप में प्रकाशित कर किया जाएगा।

आयोजक संस्था पर्वतीय सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कला समिति के अध्यक्ष हेमराज बिष्ट ने बताया कि कार्यशालाओं में रं जनजाति के वरिष्ठ नागरिकों के साथ चर्चा कर समुदाय में प्रचलित लोक कथाओं के संकलन की प्रक्रिया चल रही है।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य रं जनजाति की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना है। उन्होंने बताया कि इस कार्य के लिए आयोजित कार्यशालाओं में मुख्य रूप से लोक कथाओं का संकलन कर उन्हें नई पीढ़ी को हस्तांतरित किया जाना है। लोक संस्कृति (Folk culture) के संरक्षण की यह परियोजना 6 महीने तक चलेगी।

पहले चरण में कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, जिनके जरिये संकलित कथाओं को दूसरे चरण में संपादित किया जाएगा और फिर पुस्तक का प्रकाशन होगा।

हेमराज बिष्ट ने बताया कि राज्य में निवास करने वाले विभिन्न जनजातीय समुदायों की लोक संस्कृतियों (Folk culture)के संरक्षण और विकास की दिशा में उत्तराखंड संस्कृति निदेशालय, राज्य भर में कार्य कर रहा है। इसके अन्तर्गत सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में पर्वतीय सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कला समिति को भोटिया जनजाति में प्रचलित लोक कथाओं के संकलन की जिम्मेदारी दी गई है। इस पर संस्था पिछले चार महीने से कार्य कर रही है।

समिति अध्यक्ष बिष्ट के अनुसार हालांकि कोरोना महामारी के चलते इस परियोजना के काम में व्यवधान आया है, बावजूद इसके परियोजना समय पर पूरी कर ली जाएगी।

इन परिस्थितियों में विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में लघु गोष्ठियों का भी आयोजन किया जा रहा है, ताकि लोक संस्कृति (Folk culture) के संकलन और संरक्षण का काम व्यापक रूप से संपन्न हो सके।

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