HAPPY BIRTHDAY NAINITAL : स्कंद पुराण में नैनीताल को जाना जाता था त्रि ऋषि सरोवर नाम से , जानिए नैनीताल के रोचक इतिहास के बारे में

उत्तरा न्यूज डेस्क
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नैनीताल। सरोवर नगरी नैनीताल अपनी सुंदर वादियों और झीलों के लिए देशभर में मशहूर है। सालभर यहां पर्यटक देश विदेश से घूमने के लिए पहुंचते है। यहां की सुंदर वादियां और आबोहवा पर्यटकों को अपनी ओर खींच लाती है। बता दें कि आज ही के दिन नैनीताल की स्थापना हुई थी। आज हम आपको बताते है सरोवर नगरी का नाम नैनीताल कैसे पड़ा ? बता दें कि वर्ष 1841 में पीटर बैरन ने नैनीताल शहर की खोज की थी और इस खूबसूरत शहर के बारे में देश दुनिया को बताया था।

जिसके बाद से यहां बसासत शुरू हुई। वर्ष 1862 में नैनीताल को नॉर्थ वेस्टर्न प्रोविंसेस की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया और साथ ही नैनीताल को छोटी विलायत का दर्जा भी दिया गया है। नैनीताल का वर्णन स्कंद पुराण के मानस खंड में भी किया गया है। नैनीताल को स्कंद पुराण में पहले त्रि ऋषि सरोवर के नाम से भी जाना जाता था। अर्थात तीन साधुवों अत्रि, पुलस्क तथा पुलक की भूमि के रूप में दर्शाया गया है ।

मान्यता है कि यह तीनों ऋषि यहां पर तपस्या करने आये थे, परंतु उन्हें यहां पर उन्हें पीने का पानी नहीं मिला । अतः प्यास मिटाने हेतु वे अपने तप के बल पर तिब्बत स्थित पवित्र मानसरोवर झील के जल को साइफन द्वारा यहांं पर लाये।वही यहां का प्राचीन मंदिर विश्व विख्यात शक्तिपीठ नयना देवी मंदिर आज लोगों के लिए आस्था का केंद्र है।गौरतलब है कि 18 नवंबर 1841 को अंग्रेज पीटर बैरन ने नैनीताल की खोज की थी।

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