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करदाताओं के लिए राहत की खबर: अब रिफंड, टीडीएस और ब्याज की गड़बड़ियां तुरंत होंगी दुरुस्त

आयकर विभाग में एक आम दिक्कत यह थी कि रिटर्न दाखिल करने के बाद भी कई करदाताओं को गलत टैक्स डिमांड नोटिस मिल जाते थे…

आयकर विभाग में एक आम दिक्कत यह थी कि रिटर्न दाखिल करने के बाद भी कई करदाताओं को गलत टैक्स डिमांड नोटिस मिल जाते थे या फिर रिफंड गलत हिसाब की वजह से रुक जाता था। इन गड़बड़ियों को ठीक कराने में महीनों लग जाते थे। इसकी सबसे बड़ी वजह यह थी कि मूल्यांकन अधिकारी और केंद्रीयकृत प्रसंस्करण केंद्र यानी सीपीसी के बीच फाइलों का बार-बार आगे पीछे जाना पड़ता था। लेकिन अब यह परेशानी खत्म होने जा रही है।

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केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने 27 अक्टूबर 2025 को एक अहम अधिसूचना जारी की है जिसमें बेंगलुरु स्थित आयकर आयुक्त सीपीसी को नए अधिकार दे दिए गए हैं। अब सीपीसी सीधे उन तमाम गणनात्मक और लेखांकन से जुड़ी गलतियों को सुधार सकेगा जिनके लिए पहले एओ की मंजूरी लेनी पड़ती थी। इससे अब टैक्स सिस्टम में लगने वाला समय काफी घट जाएगा और करदाताओं को राहत मिलेगी।

पहले अगर किसी करदाता का टीडीएस सही से नहीं जुड़ता था या अग्रिम कर का मिलान नहीं बैठता था तो उसे बार-बार एओ के दफ्तर चक्कर लगाने पड़ते थे। एओ फाइल सीपीसी भेजता था और सीपीसी एओ से सफाई मांगता था। यह प्रक्रिया कई महीनों तक खिंच जाती थी। अब नया नियम कहता है कि सीपीसी खुद ऐसे मामलों में सुधार कर सकेगा चाहे वह टीडीएस या टीसीएस मिसमैच हो अग्रिम कर या सेल्फ असेसमेंट टैक्स की गलती हो या धारा 244ए के ब्याज की गलत गणना। जरूरत पड़ने पर सीपीसी सीधे डिमांड नोटिस भी जारी कर सकेगा।

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस बदलाव के बाद करदाताओं को अब छोटी गलतियों के लिए भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी क्योंकि पूरा सिस्टम अब पहले से ज्यादा जुड़ा और तेज हो गया है। चार्टर्ड अकाउंटेंट डॉ सुरेश सुराना का कहना है कि यह कदम आम लोगों के लिए बड़ी राहत है। पहले टैक्स डिमांड या रिफंड से जुड़ी गलती ठीक होने में दो से छह महीने लग जाते थे लेकिन अब यह काम कुछ ही दिनों में पूरा हो सकेगा।

सुराना का यह भी कहना है कि अब सीपीसी और एओ के बीच चलने वाला लंबा पत्राचार खत्म हो जाएगा। करदाता को अलग-अलग जगह आवेदन या शिकायत भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी। चूंकि सीपीसी पूरी तरह सिस्टम आधारित है इसलिए सुधार अब तेज और सटीक होंगे। इससे गलतियों की गुंजाइश भी कम होगी। सरकार का मकसद फेसलेस मूल्यांकन और तकनीक पर आधारित टैक्स सिस्टम को और मजबूत बनाना है और यह बदलाव उसी दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे करदाताओं और अधिकारियों के बीच अनावश्यक संपर्क भी घटेगा।