फेक न्यूज पर लगाम लगाने की मंशा पर सरकार को बड़ा झटका, व्हॉट्सएप ने मूल स्रोत का पता करने से किया इंकार

फेक न्यूज पर लगाम कसने की पहल कर रही सरकार को व्हपट्एप ने बड़ा झटका दिया है। कंपनी से साफ किया है की वह अपने…

फेक न्यूज पर लगाम कसने की पहल कर रही सरकार को व्हपट्एप ने बड़ा झटका दिया है। कंपनी से साफ किया है की वह अपने प्लेटफार्म पर संदेश के मूल स्रोत का पता लगाने के लिए सॉफ्टवेयर विकसित नहीं करने जा रही है। सरकार ने कंपनी से इस तरह की प्रौद्योगिकी लगाने की मांग की थी।

21e7b59e-b909-45ce-800c-4b81d0841272 25


फेक न्यूज को रोकने के लिए कारगर कदम उठाने की जरूरत के बीच सरकार चाहती है कि व्हॉट्सएप ऐसा समाधान विकसित करे जिससे फर्जी या झूठी सूचनाओं के स्रोत का पता लगाया जा सके। हांलाकि कई बार अफवाहों से डिजिटल मीडिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लेगे हैं और मॉब लिचिंग की घटनाएं बड़ी हैं।


इस बारे में व्हट्सएप का कहना है कि इस तरह का साफ्टवेयर बनाने से एक छोर से दूसरे छोट तक की कूटभाषा प्रभावित हो सकती है। और इससे प्रकृति पर भी फर्क पड़ेगा। कंपनी का कहना है कि हम निजता संरक्षण को कमजोर नहीं कर सकते हैं।
व्हट्सएप के प्रमुख क्रिस डेनियल्स इसी सप्ताह सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद से मिले थे। प्रसाद ने संवाददाताओं से कहा था कि सरकार ने व्हॉट्सएप से स्थानीय कॉरपोरेट इकाई बनाने और जाली संदेश के मूल स्रोत का पता लगाने को प्रौद्योगिकी समाधान विकसित करने को कहा है।

हालांकि, इसके साथ ही प्रसाद ने फेसबुक की कंपनी व्हॉट्सएप के भारत की डिजिटल कहानी में योगदान की सराहना भी की। बैठक के बाद डेनियल्स ने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था। देश में अगले साल आम चुनाव होने हैं। ऐसे में सरकार सोशल मीडिया प्लेटफार्म मसलन फेसबुक, ट्वीटर और व्हॉट्सएप से फर्जी खबरों के प्रसार को रोकने के लिए कड़े कदम उठा रही है। दुनियाभर में व्हॉट्सएप के प्रयोगकर्ताओं की संख्या डेढ़ अरब है। भारत कंपनी के लिए सबसे बड़ा बाजार है। यहां व्हॉट्सएप का इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या दो करोड़ से अधिक है।