श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) एक बार फिर चर्चाओं में है। सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने सूचना के अधिकार (RTI) से प्राप्त दस्तावेजों का हवाला देते हुए समिति की कार्यप्रणाली और वित्तीय निर्णयों पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने समिति पर श्रद्धालुओं के दान की राशि के कथित दुरुपयोग और नियमों की अनदेखी के आरोप लगाते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
वित्तीय सहायता की टाइमिंग पर उठाए सवाल
अधिवक्ता विकेश नेगी ने देहरादून में पत्रकारों से वार्ता के दौरान दावा किया कि केदारनाथ की संस्था ‘केदार सभा’ को दी गई 11 लाख रुपये की सहायता राशि की प्रक्रिया संदेह के घेरे में है।
भुगतान की परिस्थितियों पर आरोप:
अधिवक्ता का दावा है कि 10 अक्टूबर 2025 को केदार सभा ने बीकेटीसी अध्यक्ष के खिलाफ विरोध जताया था, जिसके महज दो दिन बाद 12 अक्टूबर को यह राशि स्वीकृत की गई। नेगी ने आरोप लगाया है कि यह कथित तौर पर ‘विरोध को शांत करने’ की एक कोशिश हो सकती है।
RTI दस्तावेजों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जुलाई-अगस्त में संपन्न हुई भागवत कथा के लिए ढाई महीने बाद अक्टूबर में फंड मंजूर किया गया।आरोप लगाया गया है कि इतनी बड़ी राशि जारी करने से पहले वित्त नियंत्रक (Finance Controller) की औपचारिक सहमति नहीं ली गई, जो स्थापित वित्तीय नियमों के प्रतिकूल है।
लाइव स्ट्रीमिंग और नियुक्तियों पर भी घेरा
अधिवक्ता ने केवल फंड ही नहीं, बल्कि अन्य प्रशासनिक कार्यों पर भी उंगली उठाई है:
कथा की लाइव स्ट्रीमिंग के लिए किए गए भुगतान को लेकर उन्होंने दावा किया कि संबंधित कंपनियों के कोटेशन की भाषा और तारीख एक समान थी, जो मिलीभगत की आशंका पैदा करती है। नेगी ने आरोप लगाया कि बीकेटीसी द्वारा ‘विशेष आमंत्रित सदस्यों’ की नियुक्तियां शासन के तय नियमों के बिना की गई हैं, जो उनके अनुसार वैधानिक मानदंडों पर खरी नहीं उतरतीं।
मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच की अपील
भ्रष्टाचार के प्रति राज्य सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का जिक्र करते हुए अधिवक्ता ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आस्था के इन केंद्रों की पवित्रता और मंदिर प्रबंधन की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए तथ्यों की जांच और आवश्यक कार्यवाही जरूरी है।

