देवेंद्र फडणवीस: अगर ओबीसी को नहीं दिला पाया आरक्षण तो छोड़ दूंगा राजनीति

मुंबई: महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण का मुद्दा गरमाता जा रहा है। शनिवार को भाजपा की महाराष्ट्र इकाई ने स्थानीय निकायों में ओबीसी…

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मुंबई: महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण का मुद्दा गरमाता जा रहा है। शनिवार को भाजपा की महाराष्ट्र इकाई ने स्थानीय निकायों में ओबीसी के लिए आरक्षण बहाल करने की मांग को लेकर राज्यव्यापी चक्का चक्का जाम किया। भाजपा नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो स्थानीय चुनावों में ओबीसी आरक्षण को लागू करेंगी और अगर वो ऐसा नहीं कर सके, तो वो राजनीति से संन्यास ले लेंगे।

ओबीसी आरक्षण बहाल कराने को लेकर राज्यव्यापी चक्का जाम के दौरान नागपुर में वेराइटी स्क्वायर चौक पर भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राज्य की महा विकास अघाड़ी सरकार लोगों को यह कहकर बरगला रही थी कि वो यह मुद्दा संसद में उठाएगी। उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि यह मुद्दा राज्य स्तर पर हल किया जा सकता है। राज्य सरकार कानून बनाकर स्थानीय निकायों में आरक्षण को लागू कर सकती है।

विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि या तो महाविकास अघाड़ी सरकार ओबीसी का राजकीय आरक्षण बहाल करवाए या फिर सत्ता मुझे सौंपे। यदि हम चार महीने में ओबीसी को पुनः राजकीय आरक्षण नहीं दिलवा सके, तो राजनीति छोड़ देंगे। 

वर्ष 2019 में भाजपा-शिवसेना सरकार ने स्थानीय निकायों में ओबीसी को राजनीतिक आरक्षण दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि महाराष्ट्र में संबंधित स्थानीय निकायों में ओबीसी के लिए आरक्षण, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं ओबीसी के लिए आरक्षित कुल सीटों के 50 फीसदी से अधिक नहीं हो सकता। 

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम 1961 के भाग 12 (2)(सी) की व्याख्या करते हुए ओबीसी के लिए संबंधित स्थानीय निकायों में सीटों का आरक्षण प्रदान करने की सीमा से संबंधित राज्य चुनाव आयोग द्वारा वर्ष 2018 और 2020 में जारी अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया था।  सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में उद्धव ठाकरे सरकार की याचिका भी खारिज कर दी। 

पूर्व सीएम ने कहा कि ठाकरे सरकार के नकारापन के कारण ओबीसी का राजकीय आरक्षण रद्द हुआ है। यदि वह इसे बहाल नहीं करवा पाती तो सत्ता के सूत्र हमें सौंप दे। हम यदि चार महीने में ओबीसी को पुनः राजकीय आरक्षण नहीं दिलवा सके तो राजनीति से ही संन्यास ले लेंगे।